मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति ने सौंपा ज्ञापन
बाराँ । शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति, बाराँ की ओर से जिले की प्राकृतिक, वन एवं पर्वतीय विरासत के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण मांगें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के समक्ष रखी गईं। मुख्यमंत्री के बाराँ आगमन के अवसर पर समिति के संरक्षक एडवोकेट प्रशांत पाटनी ने समिति की ओर से ज्ञापन सौंपकर शाहबाद क्षेत्र के जंगल में प्रस्तावित हाइड्रो पावर प्लांट को अन्यत्र स्थानांतरित करने तथा भारतीय वन सर्वेक्षण विभाग (FSI) की रिपोर्ट के अनुरूप बाराँ जिले की पर्वत श्रृंखलाओं को अरावली पर्वतमाला के दायरे में शामिल करने की मांग की।
समिति ने मुख्यमंत्री को सौंपे ज्ञापन में कहा कि शाहबाद घाटी बाराँ जिले की महत्वपूर्ण प्राकृतिक एवं पारिस्थितिक विरासत है। यहां के घने जंगल, पर्वतीय भू-दृश्य, जैव विविधता, जलस्रोत एवं वन्यजीव इस क्षेत्र की प्राकृतिक पहचान हैं। ऐसे संवेदनशील वन क्षेत्र में बड़े स्तर की हाइड्रो पावर परियोजना स्थापित होने से पर्यावरणीय संतुलन, वन संपदा, जैव विविधता तथा स्थानीय पारिस्थितिकी पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।
समिति ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि परियोजना से जुड़े सभी पर्यावरणीय एवं पारिस्थितिक पहलुओं का समग्र अध्ययन कराया जाए तथा शाहबाद के संवेदनशील वन क्षेत्र को बचाने के लिए प्रस्तावित हाइड्रो पावर प्लांट को किसी उपयुक्त वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।
संरक्षक प्रशांत पाटनी ने कहा कि भारतीय वन सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट में अरावली क्षेत्र के विस्तार और पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। ऐसे में बाराँ जिले की पर्वतीय एवं वन क्षेत्र वाली भौगोलिक संरचनाओं का वैज्ञानिक आधार पर परीक्षण कर उन्हें FSI की रिपोर्ट के अनुरूप अरावली क्षेत्र में शामिल किया जाना चाहिए।
समिति ने कहा कि अरावली केवल एक पर्वतमाला नहीं, बल्कि राजस्थान की पर्यावरणीय सुरक्षा, जल संरक्षण, जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन की महत्वपूर्ण आधारशिला है। बाराँ जिले की पर्वतीय श्रृंखलाओं को अरावली के व्यापक प्राकृतिक परिदृश्य से जोड़कर देखने से इनके संरक्षण को मजबूत आधार मिल सकता है।
समिति के संरक्षक एडवोकेट प्रशांत पाटनी ने कहा कि शाहबाद की प्राकृतिक विरासत केवल बाराँ जिले की संपदा नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर है। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करना समय की आवश्यकता है। यदि किसी परियोजना के कारण अत्यंत संवेदनशील प्राकृतिक क्षेत्र को स्थायी नुकसान पहुंचने की संभावना हो तो उसके लिए वैकल्पिक स्थान तलाशना ही बेहतर नीति होगी।
उन्होंने कहा कि समिति विकास विरोधी नहीं है, बल्कि प्रकृति के अनुकूल और टिकाऊ विकास की पक्षधर है। शाहबाद के जंगलों और पर्वतीय क्षेत्र को बचाने के लिए समिति लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपना अभियान जारी रखेगी।
समिति ने अपने ज्ञापन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से दोनों मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने तथा बाराँ की प्राकृतिक एवं पर्वतीय विरासत के संरक्षण के लिए ठोस पहल करने की अपेक्षा व्यक्त की है।







