अगरतला/नई दिल्ली/ बंगलुरु /विक्रम साराभाई की 107वीं जयंती के अवसर पर आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में देश के वरिष्ठ अंतरिक्ष वैज्ञानिकों, NASA की वैज्ञानिक डॉ. रोसली एम. सी. लोप्स तथा युवा विज्ञान विद्यार्थियों ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के विकास और साराभाई की दूरदर्शी सोच को याद किया।
कार्यक्रम में 8वें इंडिया इंटरनेशनल साराभाई स्टूडेंट साइंटिस्ट अवार्ड 2026 के चयनित विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। आयोजन नेशनल कौंसिल ऑफ रिसर्चर टीचर साइंटिस्ट इंडिया (विपनेट , डीएसटि , भारत सरकार), नेशनल कौंसिल ऑफ स्टूडेंट साइंटिस्ट इंडिया तथा डासा इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसका नेतृत्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त विज्ञान शिक्षक अंजन बनिक ने किया।
वरिष्ठ इसरो वैज्ञानिक प्रो. आर. आर. एलंगो ने साराभाई की ‘तकनीकी छलांग’ की सोच को याद करते हुए कहा कि भारत को दुनिया में पहले से विकसित तकनीक को बार-बार बनाने के बजाय उपलब्ध ज्ञान का आधार लेकर उससे आगे की तकनीक विकसित करनी चाहिए। उन्होंने साराभाई के नेतृत्व, टीम निर्माण और असफलताओं से सीखने की संस्कृति के प्रसंग भी साझा किए।
पूर्व इसरो वैज्ञानिक डॉ. एम. आर. शिवराम ने साराभाई के साथ अपने अनुभव बताते हुए उनके सरल एवं युवा वैज्ञानिकों के प्रति सहयोगी व्यवहार को याद किया। उन्होंने भारत में उपग्रह संचार, गगन तथा उपग्रह नेविगेशन के विकास में साराभाई की दूरदृष्टि पर प्रकाश डाला।
ए. सी. माथुर ने बताया कि साराभाई का उद्देश्य अंतरिक्ष तकनीक को केवल वैज्ञानिक उपलब्धि तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उसे आम नागरिकों के जीवन और राष्ट्रीय विकास से जोड़ना था। वहीं किशोर कुमार पी. बरुचा ने अंतरिक्ष अभियानों में कैमरा एवं ऑप्टिकल इमेजिंग तकनीक की भूमिका समझाई।
नासा की जेपी एल से जुड़ी प्रसिद्ध ग्रह वैज्ञानिक डॉ. रोसली एम. सी. लोप्स ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए वैज्ञानिक जीवन में दृढ़ता, जिज्ञासा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने अपने वैज्ञानिक जीवन के अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को नए विचारों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने पिनहोल कैमरा, प्रकाश, छाया, अवलोकन एवं डेटा संग्रह जैसे प्रयोगों के माध्यम से अपनी वैज्ञानिक समझ प्रस्तुत की। विद्यार्थियों ने कहा कि विज्ञान केवल तथ्यों को याद करना नहीं, बल्कि देखना, प्रश्न करना, प्रयोग करना और खोज करना है।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि विक्रम साराभाई की विरासत केवल भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक सोच, युवा प्रतिभा, टीम भावना, असफलताओं से सीखने और आत्मनिर्भर तकनीक विकसित करने की प्रेरणा है।
कार्यक्रम के समापन पर अंजन बनिक ने पूर्व इसरो वैज्ञानिकों से भावी पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए इस अभियान से जुड़ने तथा देशभर के विद्यार्थियों से आगामी वर्ष की प्रतियोगिता में भाग लेने का आह्वान किया।इस अवसर पर नेशनल कौंसिल ऑफ रिसर्चर टीचर साइंटिस्ट इंडिया के लिए सलाहाकार बिगुल जैन की गरिमा मय उपस्थिति रही.






