Sunday, August 9, 2026
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‘भारत बनने के दौर से गुजर रहा, देश को आर्किटेक्ट्स के अनुभव और कौशल की जरूरत’—लोकसभा अध्यक्ष

भारत सिंह चौहान

नेक्ससंगम-2026 में देशभर के 300 से अधिक आर्किटेक्ट्स, इंजीनियर्स और डिजाइनर्स ने किया भविष्य के शहरों पर मंथन; AI, टाउन प्लानिंग और विरासत संरक्षण पर चर्चा

कोटा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारत आज निर्माण और विकास के एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां देश को आर्किटेक्ट्स के अनुभव, कौशल और रचनात्मक सोच की बड़ी आवश्यकता है। तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वास्तुकला के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कर रहे हैं, लेकिन इसके साथ मानवीय संवेदनाओं और सृजनात्मकता को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। तकनीक निर्माण को अधिक उपयोगी और लाभकारी बना सकती है, लेकिन किसी भवन, शहर या स्थान में भावनाओं और संवेदनाओं का समावेश आर्किटेक्ट के अनुभव और दृष्टिकोण से ही संभव है।

बिरला शनिवार को कोटा में आयोजित दो दिवसीय ‘नेक्ससंगम-2026’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में देशभर से 300 से अधिक आर्किटेक्ट्स, इंजीनियर्स, इंटीरियर डिजाइनर्स और लैंडस्केप विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। दिल्ली, चंडीगढ़, गुरुग्राम, मध्यप्रदेश, जयपुर, उदयपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा, कुचामन सिटी और श्रीगंगानगर सहित विभिन्न शहरों से विशेषज्ञ कोटा पहुंचे हैं।

पुरानी इमारतों में छिपा है भविष्य का ज्ञान

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आधुनिक आर्किटेक्चर को अपनी विरासत और अतीत से सीखने की जरूरत है। देश में 200 से 300 वर्ष पुराने शहर और भवन आज भी वास्तुकला एवं सुनियोजित नगर निर्माण के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इन पुराने शहरों की संरचना में जल निकासी, प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप निर्माण की ऐसी व्यवस्थाएं दिखाई देती हैं, जिनसे आज की पीढ़ी बहुत कुछ सीख सकती है।

उन्होंने कहा कि जहां से भी बेहतर अनुभव और ज्ञान मिले, उसे ग्रहण किया जाना चाहिए। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से ही भविष्य के बेहतर शहरों का निर्माण संभव है।

बिरला ने कहा कि 2027 में संसद के पुराने भवन के निर्माण को 100 वर्ष पूरे हो जाएंगे। यह भवन आज भी भारतीय स्थापत्य और निर्माण कौशल की उत्कृष्ट मिसाल है। उन्होंने भारतीय स्थापत्य परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास की आवश्यकता पर बल दिया।

कोटा स्टोन पर उकेरा जगमंदिर, लोकसभा अध्यक्ष को भेंट

इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष को कोटा की पहचान कोटा स्टोन से निर्मित आकर्षक स्मृति चिह्न भेंट किया गया। करीब 8×5 इंच आकार और 250 ग्राम वजन के इस स्मृति चिह्न पर कोटा के प्रसिद्ध जगमंदिर की छवि उकेरी गई थी। कोटा के सुधीर जैन युवा गौरव एवं सौरभ गर्ग ने इसे तैयार किया।

, राजेश गुप्ता, संदीप, भुवनेश लाहोटी,सचिन शर्मा और जे.के. शर्मा सहित अन्य लोगों ने यह स्मृति चिह्न लोकसभा अध्यक्ष को भेंट किया। कोटा की स्थानीय पहचान को राष्ट्रीय स्तर के आयोजन से जोड़ने की दृष्टि से इसे विशेष पहल माना गया।

विरासत और भविष्य के शहर पर विशेषज्ञों का मंथन

‘नेक्ससंगम-2026’ का उद्देश्य वास्तुकला, अभियंत्रण, इंटीरियर डिजाइन, लैंडस्केप और नगर नियोजन से जुड़े विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर ज्ञान, अनुभव और नई तकनीकों का आदान-प्रदान करना है। आयोजन समिति के कमलेश शर्मा , आर्किटेक्ट पराग जैन आर्किटेक्ट श्रद्धा लाहोटी इंजीनियर सचिन शर्मा इंटीरियर राजविंदर कौर दीपिका शक्तवत् ने बताया कि सम्मेलन के माध्यम से कोटा की विरासत और भविष्य के शहरी विकास को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर विमर्श खड़ा करने का प्रयास किया गया है।

AI से टाउन प्लानिंग तक नई सोच

सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में वास्तुकला में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, चंडीगढ़ की नगर नियोजन अवधारणा, कोटा की विरासत का विकास, लैंडस्केप डिजाइन, सामंजस्यपूर्ण डिजाइन और आधुनिक शहरों की बदलती आवश्यकताओं पर चर्चा हुई।

‘वास्तुकला में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की शक्ति’ विषय पर वास्तुविद नरेंद्र सिंह राठौड़ एवं जयपुर स्थित आयोजन स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर की शैक्षणिक अधिष्ठाता डॉ. अर्चना राठौड़ ने प्रस्तुति दी। उन्होंने डिजाइन प्रक्रिया में AI के बढ़ते उपयोग और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

चंडीगढ़ के वास्तुविद कपिल सेठिया ने चंडीगढ़ नगर नियोजन की अवधारणा और सुव्यवस्थित शहरी विकास की विशेषताओं पर चर्चा की। वहीं वास्तुविद निरुत्तम सिंह राठौड़, राजेश गुप्ता और ब्रजेश मुक्तावत ने कोटा की ऐतिहासिक विरासत, स्थापत्य पहचान और उसे पर्यटन से जोड़ने की संभावनाओं पर विचार रखे।

गुरुग्राम के वास्तुविद राजीव खन्ना एवं रवीना खन्ना ने लैंडस्केप डिजाइन पर विचार रखे, जबकि ब्रजेश मुक्तावत एवं अभियंता मनीषा मुक्तावत ने सहयोग और सामंजस्यपूर्ण डिजाइन की आवश्यकता बताई।

कोटा की विरासत बनी विमर्श का केंद्र

वास्तुविद निरुत्तम सिंह राठौड़ ने कहा कि कोटा के पास ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के साथ चंबल, मुकुंदरा, जल और जंगल जैसी प्राकृतिक संपदा भी है। आवश्यकता इस बात की है कि इन संसाधनों को संरक्षित करते हुए उन्हें प्रभावी तरीके से देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाए। प्राकृतिक संपदा, ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान को पर्यटन से जोड़कर कोटा को नई पहचान दी जा सकती है।

9 अगस्त को विशेषज्ञ करेंगे विरासत कोटा का अनुभव

आर्किटेक्ट संदीप दंडवते कपिल तिवारी, विकास जैन रीमा गुप्ता पीयूष परेता शहनवाज ख़ान अंशिता गोयल इंटीरियर डिज़ाइनर अज़ीज़ बोहरा मनीषा शिवानानी तौसीफ़ अंसारी सम्मेलन के दूसरे दिन देशभर से आए विशेषज्ञ कोटा की वास्तविक विरासत और स्थापत्य से रूबरू होंगे। ‘विरासत, अनुभव और विदाई’ के तहत ‘विजन कोटा—उद्देश्य के साथ मिशन’ कार्यक्रम होगा। प्रतिभागियों को चित्रांकन, मार्गदर्शित शैक्षणिक भ्रमण और कोटा की विरासत एवं स्थापत्य की अनुभवात्मक यात्रा कराई जाएगी।

इंजीनियर मनीष जैन ने कहा की ‘नेक्ससंगम-2026’ कोटा के लिए केवल एक वास्तु सम्मेलन नहीं, बल्कि शहर की विरासत, प्राकृतिक संपदा, स्थानीय संस्कृति और आधुनिक विकास को एक साझा दृष्टिकोण में देखने का अवसर है। कोटा स्टोन, कोटा डोरिया, चंबल, मुकुंदरा और ऐतिहासिक स्थापत्य को आधुनिक नगर नियोजन के साथ जोड़कर शहर को राष्ट्रीय स्तर पर एक विशिष्ट विरासत एवं पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर सम्मेलन में गंभीर विमर्श हुआ।

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