कोटा। शहर में निवेश के नाम पर लोगों को साइबर ठगी के जाल में फंसाने वाले एक बड़े नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन फर्जी कॉल सेंटरों का पर्दाफाश कर गिरोह के मास्टरमाइंड समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में दो जोधपुर, दो नागौर और एक बीकानेर का रहने वाला बताया गया है।
पुलिस के अनुसार सभी आरोपी कोटा के बोरखेड़ा क्षेत्र स्थित नीलकंठ अपार्टमेंट में किराए के मकान में रह रहे थे। आरोपियों ने साइबर ठगी के लिए शहर में बाकायदा तीन कॉल सेंटर स्थापित कर रखे थे। इनमें दो कॉल सेंटर गुमानपुरा और एक छावनी क्षेत्र में संचालित किया जा रहा था।
तीनों कॉल सेंटरों पर मिलीं 57 युवतियां
पुलिस की कार्रवाई के दौरान तीनों कॉल सेंटरों पर कुल 57 युवतियां मौजूद मिलीं। पुलिस के मुताबिक इन युवतियों को लोगों से फोन पर बातचीत करने, उन्हें निवेश के लिए आकर्षित करने और अपनी बातों से प्रभावित कर अधिक रकम निवेश करवाने की ट्रेनिंग दी जा रही थी।
कॉल सेंटरों से पुलिस को कई रजिस्टर और कॉपियां भी मिली हैं। इनमें कॉल करने वाली युवतियों को बातचीत के दौरान किस तरह लोगों को विश्वास में लेना है, निवेश के लिए कैसे तैयार करना है और किस तरह उन्हें प्रभावित करना है, इसकी जानकारी लिखी हुई थी।
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन 57 युवतियों में से कितनी इस साइबर ठगी के नेटवर्क में सीधे तौर पर शामिल थीं और उनकी भूमिका क्या थी।
मोहम्मद अशफाक बताया गया मास्टरमाइंड
डीएसपी गंगासहाय शर्मा के अनुसार इस पूरे नेटवर्क का मुख्य मास्टरमाइंड मोहम्मद अशफाक है। पुलिस जांच में सामने आया कि उसने साइबर ठगी के लिए Fina-Traders.Com नाम से एक फर्जी वेबसाइट तैयार कर रखी थी।
इस वेबसाइट के माध्यम से लोगों को निवेश का लालच दिया जाता था। शुरुआत में वेबसाइट पर निवेश की गई रकम का मुनाफा तेजी से बढ़ता हुआ दिखाई देता था। इससे पीड़ितों को भरोसा होने लगता था कि उनका पैसा वास्तव में फायदे में जा रहा है।
इसके बाद आरोपियों द्वारा पीड़ितों से और अधिक रकम निवेश करवाने का प्रयास किया जाता था। पुलिस अब वेबसाइट के तकनीकी संचालन, उससे जुड़े लोगों और इसके माध्यम से अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया, इसकी जांच कर रही है।
गूगल से डाउनलोड किया हजारों लोगों का डेटा
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि कॉलिंग के लिए हजारों लोगों का डेटा गूगल से डाउनलोड किया गया था। इस डेटा में मौजूद लोगों से संपर्क कर उन्हें निवेश के नाम पर झांसे में लेने का प्रयास किया जाता था।
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह डेटा कहां से प्राप्त किया गया, किस तरह इस्तेमाल किया गया और इस नेटवर्क ने कितने लोगों को अपना निशाना बनाया।
पुलिस खंगाल रही पूरे नेटवर्क की कड़ियां
तीन कॉल सेंटरों के खुलासे के बाद पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी तलाश रही है। फर्जी वेबसाइट, कॉल सेंटरों के संचालन, युवतियों को दी जा रही ट्रेनिंग, हजारों लोगों के डेटा और निवेश के नाम पर की गई संभावित ठगी को लेकर पुलिस तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है।
पुलिस की इस कार्रवाई से साफ है कि साइबर ठग अब लोगों को निशाना बनाने के लिए संगठित तरीके से कॉल सेंटर संचालित कर रहे हैं और निवेश में भारी मुनाफे का झांसा देकर लोगों से बड़ी रकम ऐंठने का प्रयास कर रहे हैं।





