Friday, August 7, 2026
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सुवि नेत्र चिकित्सालय, कोटा में देशभर के 40 से अधिक युवा नेत्र चिकित्सकों को मिला प्रशिक्षण

कोटा। सुवि नेत्र चिकित्सालय एवं लेसिक लेजर सेंटर, कोटा में बुधवार को मेडिकल रेटिना फेलोशिप प्रशिक्षण समापन, प्रमाण-पत्र वितरण तथा नई फेलो के स्वागत के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ फिजिशियन एवं एपीआई के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. के. पारीक तथा विशिष्ट अतिथि राजकीय संभागीय सार्वजनिक पुस्तकालय, कोटा के संभागीय पुस्तकालयाध्यक्ष एवं प्रमुख और कोटा संभाग के सार्वजनिक पुस्तकालयों के नोडल अधिकारी डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव रहे।

इस अवसर पर मेडिकल रेटिना फेलोशिप का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाली डॉ. हिमांशी भारद्वाज को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं आंध्र प्रदेश के ओंगोल शहर से आईं डॉ. ललिता मनासा ने सुवि नेत्र चिकित्सालय में नई मेडिकल रेटिना फेलो के रूप में अपना प्रशिक्षण प्रारंभ किया। अतिथियों और वरिष्ठ चिकित्सकों ने दोनों युवा चिकित्सकों को उज्ज्वल, सफल और सेवाभावी भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं।

सुवि नेत्र चिकित्सालय के निदेशक एवं वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय, डॉ. विदुषी शर्मा तथा रेटिना विशेषज्ञ डॉ. निपुण बागरेचा ने बताया कि मेडिकल रेटिना फेलोशिप का उद्देश्य युवा नेत्र चिकित्सकों को रेटिना रोगों की आधुनिक जाँच, सटीक निदान, वैज्ञानिक उपचार और दीर्घकालीन प्रबंधन का व्यापक व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है। प्रशिक्षण के दौरान फेलोज़ को आधुनिक तकनीकों के साथ रोगियों की समस्याओं को संवेदनशीलता से समझने, सही चिकित्सकीय निर्णय लेने, प्रभावी संवाद स्थापित करने और टीम के साथ समन्वयपूर्वक कार्य करने का भी प्रशिक्षण दिया जाता है।

मुख्य अतिथि डॉ. के. के. पारीक ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में निरंतर अध्ययन, व्यावहारिक प्रशिक्षण और अनुभवी चिकित्सकों का मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान तेजी से विकसित हो रहा है, इसलिए प्रत्येक चिकित्सक को जीवनभर विद्यार्थी बने रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सक की वास्तविक पहचान केवल उसके ज्ञान और तकनीकी कौशल से नहीं, बल्कि रोगियों के प्रति संवेदनशील, विनम्र, नैतिक और जिम्मेदार व्यवहार से भी होती है। एक अच्छा चिकित्सक रोग के उपचार के साथ रोगी और उसके परिवार में विश्वास तथा आशा का संचार भी करता है।

विशिष्ट अतिथि डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि फेलोशिप प्रशिक्षण युवा चिकित्सकों को विशेषज्ञता प्राप्त करने, जटिल रोगों को गहराई से समझने और उनका वैज्ञानिक उपचार करने में सक्षम बनाता है। वरिष्ठ चिकित्सकों से मिला व्यावहारिक मार्गदर्शन आगे चलकर हजारों रोगियों के लिए लाभकारी सिद्ध होता है। उन्होंने युवा चिकित्सकों से नवीनतम चिकित्सा तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े रहने तथा चिकित्सा के उच्च नैतिक मूल्यों का पालन करने का आह्वान किया।

रेटिना विशेषज्ञ डॉ. निपुण बागरेचा ने कहा कि दक्षिण भारत सहित देश के विभिन्न राज्यों और शहरों से नेत्र चिकित्सकों का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए ‘शिक्षा की काशी’ कोटा आना शहर के लिए गौरव का विषय है। शिक्षा नगरी कोटा अब नेत्र चिकित्सा प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है।

डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय एवं डॉ. निपुण बागरेचा ने बताया कि फेलोशिप के दौरान नियमित शैक्षणिक कक्षाएँ, क्लिनिकल केस डिस्कशन, रेटिना इमेजिंग की व्याख्या, रोगियों की विस्तृत जाँच, उपचार योजना तैयार करने और फॉलो-अप प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाता है। फेलोज़ को इनडायरेक्ट ऑफ्थैल्मोस्कोपी, ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी—ओसीटी, फंडस फ्लोरेसिन एंजियोग्राफी—एफएफए, एंटी-वीईजीएफ इंट्राविट्रियल इंजेक्शन, रेटिनल लेजर फोटोकोएगुलेशन तथा बैराज रेटिना लेजर जैसी आधुनिक जाँच एवं उपचार पद्धतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

इसके साथ ही डायबिटिक रेटिनोपैथी, डायबिटिक मैक्युलर एडीमा, आयु-संबंधी मैक्युलर डिजनरेशन, रेटिनल वेन ऑक्लूजन, रेटिनल टियर तथा अन्य रेटिना रोगों के समयबद्ध निदान, उपचार और दीर्घकालीन प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ. एस. के. गुप्ता एवं डॉ. सुभाष गुप्ता ने कहा कि तकनीकी दक्षता के साथ सहानुभूति, प्रभावी संवाद, टीमवर्क, अनुशासन और जिम्मेदार चिकित्सकीय व्यवहार भी प्रशिक्षण का अभिन्न अंग हैं। चिकित्सा प्रशिक्षण का अंतिम उद्देश्य ऐसे सक्षम, कुशल, संवेदनशील और सेवाभावी चिकित्सक तैयार करना है, जो अपने ज्ञान एवं कौशल के माध्यम से समाज की प्रभावी सेवा कर सकें।

सुवि नेत्र चिकित्सालय में अब तक देश के विभिन्न राज्यों से आए 40 से अधिक युवा नेत्र चिकित्सकों को मेडिकल रेटिना सहित विभिन्न नेत्र चिकित्सा विषयों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. के. के. पारीक, डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव, डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय, डॉ. विदुषी शर्मा, डॉ. एस. के. गुप्ता, डॉ. निपुण बागरेचा, डॉ. सुभाष गुप्ता तथा सुवि नेत्र चिकित्सालय की पूरी टीम ने डॉ. हिमांशी भारद्वाज और डॉ. ललिता मनासा को सफल, संवेदनशील एवं सेवाभावी चिकित्सकीय जीवन के लिए शुभकामनाएँ दीं।

 

 

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