मांगरोल। नगर पालिका मांगरोल की ओर से आयोजित ऐतिहासिक सात दिवसीय तेजा दशमी जल झूलनी मेले का शुभारंभ मंगलवार को तहसील प्रांगण स्थित मेला ग्राउंड में सत्यवादी वीर तेजाजी महाराज की पूजा-अर्चना के साथ हुआ। मेले के शुभारंभ अवसर पर बड़ी संख्या में शहरवासी एवं ग्रामीणजन मौजूद रहे।
मेले के प्रथम दिन रंगमंच पर तेजाजी गायन प्रतियोगिता के साथ स्थानीय बच्चों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। शहर की लोक मंडलियों ने पारंपरिक अंदाज में वीर तेजाजी महाराज के जीवन एवं लोक आस्था से जुड़े प्रसंगों पर आधारित प्रस्तुतियां दीं। वहीं विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक वेशभूषा में एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोक कलाकार, पर्यावरणविद एवं नगर पालिका मांगरोल के ब्रांड एंबेसडर डॉ. जगदीश निराला ने कहा कि मेले हमारी लोक संस्कृति और सामाजिक समरसता के जीवंत उदाहरण हैं। मेलों के माध्यम से लोगों को एक-दूसरे की लोक परंपराओं, बोलचाल, खान-पान और वेशभूषा को जानने-समझने तथा अपनी संस्कृति के आदान-प्रदान का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि पतित पावनी बाणगंगा नदी के तट पर आयोजित होने वाला यह लोक मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। मेले में हिंदू-मुस्लिम सहित सभी वर्गों के लोग उत्साह और श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं, जो आपसी भाईचारे और सद्भाव की मिसाल प्रस्तुत करता है।
इस अवसर पर डॉ. जगदीश निराला ने अपनी धर्मपत्नी सुमित्रा जी के साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाओं को पारितोषिक वितरित कर सम्मानित किया। पुरस्कार पाकर प्रतिभागियों में उत्साह नजर आया।
सात दिवसीय मेले को लेकर मांगरोल शहर और आसपास के क्षेत्र में खासा उत्साह बना हुआ है। आगामी दिनों में भी मेला ग्राउंड में विभिन्न सांस्कृतिक, धार्मिक एवं मनोरंजक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मेले में क्षेत्र की लोक संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक समरसता की झलक देखने को मिल रही है।





