कोटा। डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच अक्सर यह सवाल उठता है कि यदि किसी समाचार पत्र का पंजीकरण पाक्षिक (Fortnightly) है, तो क्या वह प्रतिदिन डिजिटल माध्यमों पर समाचार या ई-पेपर प्रकाशित कर सकता है? इस विषय को लेकर पत्रकारों और पाठकों के बीच अलग-अलग धारणाएं देखने को मिलती हैं।
मीडिया विशेषज्ञों के अनुसार, प्रिंट और डिजिटल प्रकाशन दो अलग-अलग माध्यम हैं। यदि किसी समाचार पत्र का पंजीकरण आरएनआई (Registrar of Newspapers for India) में पाक्षिक के रूप में है, तो उसका मुद्रित संस्करण निर्धारित आवृत्ति यानी प्रत्येक 15 दिन में ही प्रकाशित होना चाहिए।
हालांकि, यदि वही संस्थान अपनी वेबसाइट, यूट्यूब चैनल, फेसबुक पेज या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रतिदिन समाचार प्रकाशित करता है, तो सामान्य परिस्थितियों में इसे केवल इस आधार पर अवैध नहीं माना जाता। डिजिटल माध्यमों पर समाचार प्रसारित करने के लिए संबंधित कानूनों, जैसे आईटी अधिनियम, कॉपीराइट, मानहानि और अन्य लागू नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई संस्था अपने पाक्षिक आरएनआई पंजीकरण के बावजूद उसी पंजीकरण के नाम पर प्रतिदिन प्रिंट अखबार या दैनिक ई-पेपर प्रकाशित करती है और उसे पंजीकृत संस्करण के रूप में प्रस्तुत करती है, तो यह नियमों के उल्लंघन का विषय हो सकता है और संबंधित प्राधिकरण इसकी जांच कर सकता है।
क्या है निष्कर्ष?
पाक्षिक पंजीकरण का पालन प्रिंट संस्करण में अनिवार्य है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रतिदिन समाचार प्रकाशित करना सामान्यतः प्रतिबंधित नहीं है।
यदि पंजीकरण की शर्तों का उल्लंघन कर दैनिक प्रिंट या ई-पेपर प्रकाशित किया जाता है, तो संबंधित प्राधिकरण कार्रवाई कर सकता है।
: यह समाचार सामान्य कानूनी जानकारी पर आधारित है। किसी विशेष संस्था या मामले में अंतिम निर्णय संबंधित कानूनों, दस्तावेजों और सक्षम प्राधिकरण की जांच पर निर्भर करेगा।






