कोटा। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड (ONORC)’ योजना का उद्देश्य यह है कि देश का कोई भी पात्र राशन कार्डधारक किसी भी अधिकृत उचित मूल्य की दुकान से अपना खाद्यान्न प्राप्त कर सके। लेकिन कोटा शहर और आसपास के क्षेत्रों में इस योजना का लाभ आम लोगों तक सुचारू रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। ऑनलाइन व्यवस्था होने के बावजूद उपभोक्ताओं को राशन के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान तक भटकना पड़ रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब वे किसी दूसरे राशन डीलर के पास गेहूं या अन्य खाद्यान्न लेने पहुंचते हैं, तो उन्हें यह कहकर लौटा दिया जाता है कि “तुम्हारा राशन जिस दुकान से पहले मिलता था, वहीं से लो।” कई बार उपभोक्ता घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद जब उनकी बारी आती है, तब उन्हें राशन देने से मना कर दिया जाता है। ऐसे में आम नागरिक का समय और मेहनत दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
कई लाभार्थियों का आरोप है कि एक राशन डीलर उन्हें दूसरे डीलर के पास भेज देता है और दूसरा फिर पहले के पास वापस भेज देता है। इस चक्कर में गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों को पूरा दिन खराब करना पड़ता है। रोज कमाने-खाने वाले लोगों के लिए यह स्थिति और भी मुश्किल बन जाती है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि जब सरकार ने राशन वितरण की पूरी व्यवस्था ऑनलाइन कर दी है और ‘वन नेशन, वन राशन’ योजना लागू है, तो फिर किसी भी अधिकृत उचित मूल्य की दुकान से राशन मिलने में परेशानी क्यों हो रही है? यदि तकनीकी रूप से लाभार्थी पात्र है और उसका सत्यापन हो चुका है, तो उसे किसी भी दुकान से खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
लोगों का यह भी आरोप है कि कई राशन डीलर “स्टॉक खत्म हो गया”, “सर्वर नहीं चल रहा” या “यहां राशन नहीं मिलेगा” जैसे बहाने बनाकर उपभोक्ताओं को वापस लौटा देते हैं। इससे कई स्थानों पर बहस और विवाद की स्थिति भी बन रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना के नियमों के अनुसार लाभार्थी किसी भी उचित मूल्य की दुकान से राशन लेने का अधिकार रखता है, तो सभी राशन डीलरों को इन नियमों का पालन करना चाहिए। यदि किसी तकनीकी या प्रशासनिक कारण से वितरण संभव नहीं है, तो उसकी स्पष्ट जानकारी उपभोक्ता को दी जानी चाहिए, न कि उसे बिना कारण परेशान किया जाए।
आमजन की प्रमुख मांगें
‘वन नेशन, वन राशन’ योजना के नियमों का सभी राशन डीलरों को प्रभावी प्रशिक्षण दिया जाए।
प्रत्येक उचित मूल्य की दुकान पर योजना के नियम और पात्रता संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए।
बिना उचित कारण लाभार्थियों को लौटाने वाले डीलरों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए प्रभावी हेल्पलाइन और निरीक्षण व्यवस्था सक्रिय की जाए।
सभी दुकानों पर पर्याप्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए ताकि “स्टॉक खत्म” का बहाना न बनाया जा सके।
आम नागरिकों का कहना है कि सरकार ने राशन व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए हैं, लेकिन यदि जमीनी स्तर पर लाभार्थियों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़े और फिर भी राशन न मिले, तो योजना का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
अब जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन और रसद विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए वास्तविक स्थिति की जांच करे और ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करे, जिससे पात्र लाभार्थी को बिना भटकाव, बिना विवाद और बिना अनावश्यक परेशानी के उसका राशन किसी भी अधिकृत उचित मूल्य की दुकान से आसानी से मिल सके। तभी ‘वन नेशन, वन राशन’ योजना का वास्तविक उद्देश्य सफल माना जाएगा।
वरिष्ठ पत्रकार अशफाक अंसारी की रिपोर्ट 






