बारां/शाहबाद संरक्षित वन अभ्यारण्य क्षेत्र की 408 हेक्टेयर बहुमूल्य वन भूमि को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा एक निजी बिजली परियोजना ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद को आवंटित किए जाने के खिलाफ विरोध की ज्वाला तेज हो गई है। पर्यावरण, जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी को बचाने के लिए देश भर के पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ताओं द्वारा ‘शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन’चलाया जा रहा है।
इसी क्रम में, आंदोलन को और अधिक मजबूती प्रदान करते हुए महिला चौपाल समूह, बारां’की महिला सदस्यों ने शाहबाद के जंगलों में पहुँचकर एक विशाल मानव श्रृंखला बनाई। महिलाओं ने शांतिपूर्ण एवं प्रभावी ढंग से ‘शाहपुरा पंप्ड स्टोरेज पावर प्लांट’ परियोजना का कड़ा विरोध दर्ज कराया और ‘शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति, बारां’ द्वारा चलाए जा रहे इस जन-आंदोलन को अपना पूर्ण और सक्रिय समर्थन देने का ऐलान किया।
मानव श्रृंखला के दौरान महिला चौपाल समूह की प्रतिनिधियों नीता शर्मा,जिया सोन,शालिनी कुमारी ,निर्मला मेघवाल,नंदिनी और अन्य ने कहा कि “शाहबाद का जंगल न केवल दुर्लभ प्राकृतिक वनस्पतियों और वन्यजीवों का आशियाना है, बल्कि यह क्षेत्र की जलवायु, भूजल स्तर और स्थानीय समुदायों के अस्तित्व का मुख्य आधार है। कॉरपोरेट लाभ के लिए सैकड़ों हेक्टेयर संरक्षित वन भूमि की बलि देना पर्यावरण के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। महिलाओं ने मांग की कि 408 हेक्टेयर वन भूमि को ‘ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड’ को सौंपने का निर्णय केंद्र व राज्य सरकार तुरंत वापस ले। शाहबाद अभ्यारण्य को किसी भी प्रकार की औद्योगिक या कॉरपोरेट व्यावसायिक गतिविधियों से पूरी तरह मुक्त घोषित किया जाए।स्थानीय जन-भावनाओं और पर्यावरण पर पड़ने वाले विपरीत प्रभावों को ध्यान में रखते हुए इस विनाशकारी परियोजना पर रोक लगाई जाए।शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति ने महिला चौपाल समूह का आभार व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक शाहबाद के जंगलों को बचाने का यह फैसला वापस नहीं लिया जाता, तब तक यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से और अधिक उग्र एवं व्यापक रूप से जारी रहेगा।






