कोटा। सावन मास की शुरुआत के साथ ही कोटा के शिवालयों में भगवान भोलेनाथ के जयकारों की गूंज सुनाई देने लगी है। सुबह से ही श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों में पहुंच रहे हैं। हर-हर महादेव और जय भोलेनाथ के जयघोषों से पूरा वातावरण शिवमय बना हुआ है। इन दिनों कोटा का प्रसिद्ध शिवपुरी धाम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां स्थापित 525 शिवलिंगों के दर्शन और जलाभिषेक के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंच रहे हैं।
शिवपुरी धाम के संत महेश पुरी महाराज ने बताया कि यहां बड़े गुरुजी राणाराम पुरी बाबा की मुख्य समाधि स्थित है। उन्होंने बताया कि राणाराम पुरी बाबा नेपाल से 525 शिवलिंगों की स्थापना का नक्शा लेकर आए थे। उनके शिष्य परम सिद्ध सनातन पुरी महाराज ने यह संकल्प लिया कि जब तक 525 शिवलिंगों की स्थापना पूरी नहीं होगी, तब तक वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। इस संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने लगातार 12 वर्षों तक एक पैर पर खड़े रहकर कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या और संकल्प के बाद शिवपुरी धाम में 525 शिवलिंगों की स्थापना संपन्न हुई, जो आज श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र हैं।
महेश पुरी महाराज ने बताया कि सावन माह भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भी भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सावन में कठोर तपस्या की थी। इसी कारण इस माह में शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, दही, घी, शक्कर और पंचामृत से अभिषेक करने का विशेष महत्व माना जाता है।
सावन के दौरान विशेष रूप से रविवार और सोमवार को शिवपुरी धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। प्रतिदिन करीब 8 से 10 हजार श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं। बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्थाओं को और मजबूत किया है।
सावन के पावन अवसर पर शिवपुरी धाम में उमड़ रही श्रद्धा और भक्ति यह दर्शाती है कि भगवान भोलेनाथ के प्रति लोगों की आस्था आज भी अटूट है। 525 शिवलिंगों और 12 वर्षों की कठोर तपस्या की यह प्रेरणादायक गाथा शिवपुरी धाम को हाड़ौती क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशिष्ट पहचान दिलाती है।






