Friday, July 31, 2026
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कोटा:भगवान महावीर का वीतराग मार्ग ही आत्मकल्याण का शाश्वत पथ, भ्रम नहीं सिद्धांतों का करें अनुसरण : निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज

भगवान महावीर का वीतराग मार्ग ही आत्मकल्याण का शाश्वत पथ, भ्रम नहीं सिद्धांतों का करें अनुसरण : निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज

वीर शासन जयंती पर पुण्योदय अतिशय क्षेत्र नसियां जी में उमड़ा श्रद्धा का सागर; मुनिश्री बोले— प्रत्येक जीव में भगवान बनने की क्षमता, सम्यग्दर्शन और आत्मसाधना ही मोक्ष का एकमात्र मार्ग

कोटा, 30 जुलाई। भगवान श्री 1008 महावीर स्वामी की प्रथम दिव्यध्वनि (दिव्य देशना) तथा जिनशासन प्रवर्तन दिवस ‘वीर शासन जयंती’ के पावन अवसर पर श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी में आयोजित धर्मसभा श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना से अनुप्राणित रही। भगवान महावीर के केवलज्ञान के उपरांत श्रावण कृष्ण प्रतिपदा को प्रकट हुई दिव्य देशना की स्मृति में श्रद्धालुओं ने जिनवाणी, गुरु और धर्म के प्रति अपनी अटूट आस्था व्यक्त की।

इस अवसर पर परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज ने भगवान महावीर की दिव्य देशना का गहन आध्यात्मिक विवेचन करते हुए कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्मकल्याण है और उसका शाश्वत मार्ग भगवान महावीर द्वारा प्रतिपादित वीतरागता, अहिंसा, सम्यग्दर्शन और आत्मसाधना ही है। समय और परिस्थितियाँ बदल सकती हैं, किन्तु सत्य, धर्म और मोक्षमार्ग के सिद्धांत कभी नहीं बदलते।

मंदिर के निदेशक हुकम जैन ‘काका’, अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ एवं महामंत्री महेन्द्र कासलीवाल ने बताया कि वीर शासन जयंती पर आयोजित विशेष धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर भगवान महावीर की दिव्य देशना का श्रवण किया तथा जिनशासन की प्रभावना में सहभागी बने।

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भगवान महावीर की दिव्य देशना आज भी मानवता का पथप्रदर्शक

मुनिश्री ने कहा कि भगवान महावीर की वीतराग वाणी हजारों वर्षों पूर्व जितनी प्रासंगिक थी, आज भी उतनी ही जीवनोपयोगी है। यदि मानव समाज उनके अहिंसा, अपरिग्रह, करुणा और समता के सिद्धांतों को जीवन में उतार ले, तो परिवार, समाज और विश्व—सभी स्तरों पर शांति, सौहार्द और सद्भाव की स्थापना संभव है।

उन्होंने कहा कि महावीर का शासन किसी काल विशेष तक सीमित नहीं, बल्कि अनगिनत वर्षों तक मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा। इसलिए भ्रम, अंधानुकरण और भटकाव से बचते हुए प्रत्येक व्यक्ति को भगवान महावीर के बताए सिद्धांतों का अनुसरण करना चाहिए।

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प्रत्येक जीव में भगवान बनने की अनंत संभावना

अपने ओजस्वी प्रवचन में मुनिश्री ने कहा कि भगवान महावीर कोई अलौकिक अपवाद नहीं थे। उन्होंने भी तप, त्याग, संयम और आत्मसाधना के माध्यम से कर्मों का क्षय कर सिद्धत्व प्राप्त किया। इसीलिए प्रत्येक जीव में भगवान बनने की अनंत क्षमता विद्यमान है।

उन्होंने कहा कि भगवान बनने का कोई नया या वैकल्पिक मार्ग नहीं है। जिस मोक्षमार्ग पर चलकर तीर्थंकरों ने परम सिद्धि प्राप्त की, वही मार्ग आज भी प्रत्येक जीव के लिए समान रूप से उपलब्ध है।

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कर्मों का क्षय ही देवत्व से देवाधिदेव बनने का मार्ग

मुनिश्री ने कर्म सिद्धांत का अत्यंत सरल एवं प्रभावशाली विवेचन करते हुए कहा कि संसार में प्राप्त होने वाले सुख-दुःख, पद, प्रतिष्ठा और परिस्थितियाँ सभी कर्मों के उदय का परिणाम हैं। देवगति भी पुण्य कर्मों से प्राप्त होती है, किन्तु देवाधिदेव की अवस्था तभी प्राप्त होती है जब समस्त कर्मों का पूर्णतः क्षय हो जाता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल स्वर्ग प्राप्त करना अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि वीतराग अवस्था प्राप्त कर जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होना ही जीवन की सर्वोच्च उपलब्धि है।

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सम्यग्दर्शन बदल देता है जीवन की दिशा

मुनिश्री ने कहा कि अनादिकाल से जीव भगवान के वास्तविक स्वरूप तथा अपने आत्मस्वरूप को न पहचान पाने के कारण संसार में भटक रहा है। जब सम्यग्दर्शन और सम्यक्ज्ञान का उदय होता है, तभी जीवन की दिशा बदलती है और आत्मा मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होती है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार सही दिशा में चलने वाला यात्री निश्चित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँचता है, उसी प्रकार सम्यक श्रद्धा और सम्यक ज्ञान से युक्त साधक भी निश्चय ही आत्मकल्याण के लक्ष्य तक पहुँचता है।

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वीर शासन जयंती पर भक्ति और आराधना का अनुपम वातावरण

वीर शासन जयंती के अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक, जिनवाणी वंदना एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर की प्रथम दिव्यध्वनि का स्मरण करते हुए जिनशासन के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की तथा धर्म, संयम और आत्मसाधना के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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आज के प्रमुख पुण्यार्जक

समिति अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ ने बताया कि आज की शांतिधारा का पुण्यार्जन राजेन्द्र जी, हुकम जैन ‘काका’, प्रकाश हरसोरा परिवार तथा श्रीमती सुशीला जी एवं श्री विवेक जी ठोरा परिवार द्वारा प्राप्त किया गया।

उपाध्यक्ष सुमित जैन ने बताया कि श्रावक श्रेष्ठी, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट का पुण्यार्जन भानु जी, विमला जी, एकता जी, कुनाल जी, भावना जी एवं रक्षित बोरखंडिया परिवार द्वारा श्रद्धाभावपूर्वक संपन्न हुआ।

मनोज बगड़ा ने बताया कि भक्तामर विधान का पुण्यार्जन पुण्योदय भक्तामर मंडल के समस्त सदस्य परिवारों द्वारा प्राप्त किया गया।

कानूनी सलाहकार हुकमचंद जी ने बताया कि मुनिश्री के आहारदान का सौभाग्य संतोष कुमार जी एवं आशीष जैन हरसोरा परिवार को तथा क्षुल्लक श्री संयम सागर जी के आहारदान का सौभाग्य अभय कुमार जी नगेदा परिवार को प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री की पूजन-अर्चना में अर्घ्य समर्पित कर धर्मलाभ अर्जित किया।

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गुरुवाणी के अमृत संदेश

🔸 भगवान महावीर का वीतराग मार्ग ही आत्मकल्याण का शाश्वत मार्ग है।

🔸 समय बदल सकता है, पर सत्य और धर्म के सिद्धांत कभी नहीं बदलते।

🔸 प्रत्येक जीव में भगवान बनने की अनंत क्षमता विद्यमान है।

🔸 कर्मों का पूर्ण क्षय ही सिद्धत्व और मोक्ष की प्राप्ति का आधार है।

🔸 सम्यग्दर्शन, सम्यक्ज्ञान और सम्यक्चरित्र ही आत्मा को परमात्मा बनाने का मार्ग हैं।

🔸 भ्रम, अंधानुकरण और भटकाव से बचकर भगवान महावीर के सिद्धांतों का अनुसरण ही जीवन की सबसे बड़ी साधना है।

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