Thursday, November 5, 2026
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कोटा गढ़ पैलेस की ऐतिहासिक जंतर बुर्ज पर हुआ वायु धारणा पूजन, सामान्य से अधिक बारिश के संकेत

धान्य परीक्षण में फसलों पर कीट प्रकोप की भी जताई गई आशंका, सदियों पुरानी परंपरा का हुआ निर्वहन

कोटा।आषाढ़ी पूर्णिमा के पावन अवसर पर कोटा गढ़ स्थित ऐतिहासिक जंतर बुर्ज पर रियासतकालीन परंपरा के तहत वायु धारणा पूजन विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। राव माधौ सिंह म्यूजियम ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष अनुष्ठान का नेतृत्व प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं कर्मकांड विशेषज्ञ पंडित आशुतोष दाधीच ने किया। इस अवसर पर म्यूजियम ट्रस्ट के पदाधिकारी, श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे।

सदियों से चली आ रही इस अनूठी परंपरा के अंतर्गत वायु की दिशा, गति तथा धान्य परीक्षण के आधार पर आगामी मानसून और कृषि उत्पादन का पारंपरिक आकलन किया जाता है। इस वर्ष किए गए परीक्षण में हाड़ौती अंचल के लिए शुभ संकेत मिले हैं।

पंडित आशुतोष दाधीच ने बताया कि वायु धारणा पूजन के दौरान वायु के प्रवाह और धान्य परीक्षण का विश्लेषण करने पर यह संकेत प्राप्त हुए हैं कि इस वर्ष हाड़ौती क्षेत्र में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है। पर्याप्त वर्षा से किसानों को लाभ मिलने और जल स्रोतों के भरने की उम्मीद जताई गई है।

हालांकि, धान्य परीक्षण में एक महत्वपूर्ण संकेत यह भी मिला कि मौसम की अनुकूलता के साथ-साथ फसलों में कीट प्रकोप बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी। ऐसे में किसानों को समय रहते फसलों की निगरानी करने और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार आवश्यक उपाय अपनाने की आवश्यकता होगी।

उन्होंने बताया कि रियासतकाल से चली आ रही यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि प्रकृति के संकेतों को समझने की एक प्राचीन भारतीय पद्धति भी है। वर्षों से आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन इस अनुष्ठान का आयोजन किया जाता रहा है और इसे स्थानीय जनमानस विशेष श्रद्धा और विश्वास के साथ देखता है।

पूजन के दौरान भगवान का विधिवत अभिषेक, मंत्रोच्चार और वैदिक रीति से अनुष्ठान संपन्न कराया गया। कार्यक्रम के अंत में क्षेत्र में अच्छी वर्षा, समृद्ध कृषि, सुख-समृद्धि और जनकल्याण की मंगलकामना की गई।

हाड़ौती में यदि पारंपरिक वायु धारणा पूजन के संकेत सही साबित होते हैं तो इस वर्ष अच्छी बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आ सकती है। हालांकि कीट प्रकोप की आशंका को देखते हुए कृषि क्षेत्र में सतर्कता भी जरूरी होगी। सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी कोटा की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है।

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