मांगरोल। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर विश्व शांति, पर्यावरण संवर्धन एवं जनमानस में देवत्व जागरण के उद्देश्य से मां कंकाली माता परिसर में पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया। महायज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आहुतियां अर्पित कर विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि और मानवता के मंगल की कामना की।
इस अवसर पर पर्यावरणविद एवं कवि डॉ. जगदीश निराला ने अपने उद्बोधन में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि जिस धरती ने हमें जीवन, ज्ञान और पुरुषार्थ प्रदान किया है, उसके प्रति हमारा भी दायित्व है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए। यह केवल पेड़ नहीं, बल्कि जीवनदायी ऑक्सीजन प्लांट हैं, जो मानव जीवन के लिए अमूल्य हैं।
डॉ. निराला ने वटवृक्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यही बोधिवृक्ष है, जिसके नीचे भगवान शिव ने तपस्या की और भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के लिए साधना की। प्राचीन काल से न्याय पंचायतें भी वटवृक्ष की छांव में बैठकर निर्णय करती रही हैं, इसलिए इसका धार्मिक, सामाजिक और पर्यावरणीय महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गायत्री परिवार शाखा मांगरोल द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में डॉ. जगदीश निराला का माल्यार्पण, दुपट्टा ओढ़ाकर एवं नागरिक अभिनंदन कर सम्मानित किया गया। व्यासपीठ से वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं यज्ञ संचालक इंद्रजीत सैनी ने गायत्री परिवार की महत्ता बताते हुए डॉ. निराला के कृतित्व एवं व्यक्तित्व की सराहना की। उन्होंने उन्हें समाज सेवा और पौधारोपण के क्षेत्र में प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके कार्यों का अनुसरण करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संयोजन बाबूलाल बैरवा ने किया। इस अवसर पर रवि जैन, हरि ओम गौतम, सुरेश सुमन सहित गायत्री परिवार के अनेक कार्यकर्ता एवं नगर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।






