नगरीय एवं जिला प्रशासन के सहयोग से आपसी संवाद और सहमति से समाधान पर जोर
बाराँ। समाज और शहर की स्थानीय समस्याओं को आपसी संवाद, सहमति और साझेदारी के माध्यम से सुलझाने की आवश्यकता को महसूस करते हुए चौपाल महिला समूह ने अपने कार्यक्षेत्र के विस्तार की दिशा में पहल शुरू की है। इसी क्रम में समूह की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें शहर की अन्य कॉलोनियों की जागरूक महिलाओं को चौपाल से जोड़ने तथा विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक प्रयास करने पर विचार-विमर्श किया गया।
भारतीय सांस्कृतिक निधि वराह नगरी बाराँ अध्याय द्वारा प्राचीन ग्राम्य संस्कृति की लुप्त होती परंपरा ‘चौपाल’ को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से नाकोड़ा कॉलोनी में प्रयोग के तौर पर चौपाल महिला समूह का गठन किया गया था। चौपाल पर महिलाओं द्वारा स्थानीय समस्याओं पर सामूहिक चर्चा कर आपसी सहमति से समाधान के प्रयास किए गए, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए।
चौपाल संयोजिका नीता शर्मा ने बताया कि नाकोड़ा कॉलोनी में चौपाल के प्रयोग से मिले सकारात्मक परिणामों के बाद कार्यक्षेत्र को व्यापक बनाने का निर्णय लिया गया है। शहर की अन्य कॉलोनियों की जागरूक महिलाओं से संपर्क किया जा रहा है, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों की समस्याओं को एक साझा मंच पर लाकर उनके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास किए जा सकें।
उन्होंने कहा कि चौपाल केवल बैठक का मंच नहीं, बल्कि संवाद, सहभागिता, सहमति और समाधान की भारतीय परंपरा है। यदि स्थानीय नागरिक, नगरीय प्रशासन और जिला प्रशासन मिलकर समस्याओं पर विचार करें तो अनेक छोटी-बड़ी समस्याओं का समाधान टकराव के बजाय आपसी समझ और सहयोग से किया जा सकता है।
उप संयोजिका डिम्पल जयंत ने कहा कि चौपाल का कार्यक्षेत्र बढ़ने से शहर के अन्य क्षेत्रों की समस्याओं को भी सामने लाने और उनके समाधान के लिए साझेदारी विकसित करने का अवसर मिलेगा। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से स्वच्छता, पेयजल, सड़क, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा, सामाजिक समरसता तथा अन्य स्थानीय समस्याओं पर सकारात्मक पहल की जा सकेगी।
बैठक में नीता शर्मा, डिम्पल जयंत, प्रेमलता ओझा, ऊषा शर्मा, रेणु चौधरी, कविता मीणा, गिनता मीणा, मंजू हाड़ा, सोनम, अनिता मीणा, शीतल पुष्पकर,आशा नागर, मनीषा गुर्जर समेत अन्य सदस्याओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि नगरीय प्रशासन एवं जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर नागरिकों की समस्याओं को उचित मंच तक पहुंचाया जाए और प्रशासन तथा समाज के बीच संवाद का प्रभावी सेतु बनाया जाए।






