Thursday, July 23, 2026
IMG-20260122-WA0067
previous arrow
next arrow

Top 5 This Week

Related Posts

हाड़ौती की लोक संस्कृति का अनुपम पर्व: लाड़ी बूह्णी

कोटा/ ख़ासकर कृषि लोक संस्कृति देहाती पर्व है लाडी बूह्णी का त्यौहार . जब खेतों में फसले लहराने लगती है चहुँ और हरियाली छा जाती है,लगने लगता है कि अब जबरदस्त सावन भादो की बारिश होगी उससे पूर्व आती है देवशयनी एकादशी जिसे कहा जाता है लाड़ी बूह्णी, जिसका सीधा-सीधा अर्थ है, लाडियो का ससुराल से पीहर आना पीहर से ससुराल चले जाना, काश्तकार फुर्सत के क्षणों में समधि के यहां जाकर अपनी बहन बेटियों को ससुराल से पीहर में ले आते हैं

जिनको ससुराल भिजवाना होता है उनके लिए यह आखिरी सावा यानि सगुन होता है शादी ब्याह या पुनर्विवाह जिसे देहात में नाता प्रथा भी कहते हैं , वो भी इसी दिन तर हो जाते है।

नदी नाले भरपूर जवानी पर होते हैं वहीं कच्चे रास्ते आवागमन को अवरुद्ध कर देते हैं ।यही समय होता है लोक जीवन में अलगोजों की धुन बज उठती है तो ढोलक की थाप पर तेजाजी की धुनें गूंज उठती है,लोकगीत ढोला मारू गए जाते हैं ‘रात्रि मेंलोक नाटकों का भी मंचन होता है,

जिन में प्रमुख है हरिश्चंद्र तारामती भक्त प्रहलाद राजा मोरध्वज ढोल मरवण की लीलाओं का मंचन अक्सर ग्रामीण किया करते हैं ।

नई दुल्हन जब ससुराल आ जाती है,किशोरिया भी कपड़े के गुड्डे गुड़िया बनाती है,जिसे कहा जाता है लाडा-लाडी आज ही के दिन हमारी संस्कृति में बालिकाएं गीत गाते हुए,नदी नालों पोखरों में जाकर अपनी गुड़िया को दूल्हे के संग बहा देती है,इसका तात्पर्य है,जवान होती बेटी यही बताना चाहती है कि अब मेरे खेलने कूदने के दिन समाप्त हुए,उसके मन में भी दुल्हन बनने के सपने पनपने लगते हैं,जिन्हें इस तरह गीत में बयां करती है ।

लाडी बुहाबा म्हूं चाली,

म्हारे भाभी हाळो पडळो ला रे म्हारा बीर,,,,

लाडी बुहार म्हूं पाछि आई म्हारे हिंदबा में रस्सडि घला दै म्हारा बीर,,,

इसी अवसर पर बच्चियां नदी पोखर तालाब पर जाकर सहेलियों को आपस में गीतगाते हुऐ गुड़ धाणी का वितरित करती है ।

आज के दिन बालिकाएं युवतिया महिलाएं झूला झूलने की भी परंपरा का निर्वाह भी करती है ।

नीम इमली आम की बड़ी शाखाओ पर झूले डाले जाते हैं,झूला झूलने के भी गीत है,

दादा जी भीज्या म्हारा माळ मं री, म्हारी जीज्या पे चोया रंग म्हैल री,

कोई सावण बरस्यो सरपड़ो,,

झूला झूलते हुए महिलाएं उठ बैठ करते हुए गोड़ि भी देती है,जिससे झूले को गति मिलती है,इसे ही गोडी देना कहते हैं

झूले की एक रस्सी पर दूसरी रस्सी का टुकड़ा बांधकर महिलाएं खींच-खींच कर चलाती है इसी को जिसे घोड़ली भी कहते हैं ।

झूला झूलते हुए सहेलियां अपनी सहेली को जो झूल रही होती है उसे डंडे मार कर पति का नाम पूछती है ,

जैसे एक गीत में मैंने भी भाव अंकित किये है ‘

एक दनां तो असि बीती,

भायल्या लेगी बहकाती,

हिंदळा पे जाय बठाणि,

दैवै मचौळा गाती गाती,

कामड्या लगाई दोई च्याँर ।

नाव तो पूछे छै भरतार को ‘

अपनी मां को सुझाव भी देती है कि मुझे इस संकट से बचा,

देखिए एक झलक

चौखी सी तरकीब बतादै भायल्या सूं फन्द छुड़ा दै

हाथा मांहि नाव गुदादै,

य्हां वांकि तस्बीर बणादै,

सभीने देऊंगी समझाय ।

व्हे नाव तो पूछै छै भरतार को ….

नाम बताने के भी दोहे होते हैं

सूनां को बेवड़ो, चांदी की झारी,

जगदीश जी पिया म्हारा, म्हूं वांकि प्यारी

भीत मं भलकारों,

म्हूं गोपाल जी हलकारो ‘

इस तरह के कई दोहे प्रचलित है ।

कुंवारी लड़कियां गाती है,

म्हारे भाभी हाळो पडळो लारे म्हारा बीर,

गीत में भाव अंकित है कि अब मैं भी यौवन की दहलीज पर हूं मेरी भी शादी के सगुन की तैय्यारी कीजिए ।गीत के इशारों इशारों में इंगित करती है परिवार वालों को,

जो दुल्हन सज कर ससुराल में जाती है,उनका वहां पहला दिन होता है यानि शगुन होता है,उसे भी हमारी परंपरा में ब्हूणी कहते है,इसी शब्द को खरीदारी में दुकानदार भी ब्हुणी का नाम लेकर शुरुआत करता है ।

राजस्थानी के एक गीत में नायिका के भाव देखे,

म्है ऐस्यो बालम चाहू जो करिदै म्हारी बूहणी…

आज ही के दिन सगाई का दस्तूर दुल्हे वाले दुल्हन के घर पर लेकर आते है जिसे छोह्डा कहते है। दुल्हन के लिए सावली घाघरी कब्जा चूडी टींकी पायल बीच्छ्या मिठाई खिलोने लाकर मूहर्त करते है इसे चौह्डा चढ़ाना कहते है,इसी प्रकार से लड़के के लिए भी चतरा चौथ यानी गणेश चतुर्थी पर,लड़की वाले कपड़े मिठाई खिलौने में चकरी भंवरा लकड़ी के जंजीरे कड़े लेकर जाते हैं ।जब दोनों तरफ से चौह्डै की रस्म हो जाती है तो सगाई पक्की मानी जाती है ।हमारी हाडोती में बरसाती बहुत सारे लोकगीत है जिनकी ईश्वर लहरियों से हमारा ग्रामीण अंचल सुखमयी हो जाता है

और इस प्रकार से हमारी लाडी बूह्णी का त्योहार संपन्न होता है ।

राजस्थानी साहित्यकार

कवि डॉक्टर जगदीश निराला

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles