राजस्थान तकनीकी विश्व विद्यालय में विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय पर विशेषज्ञ व्याख्यान ,थॉट लैब वेबसाइट लॉन्च
कोटा, 21 जुलाई। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय कोटा के थॉट एंड इनोवेशन सेंटर (थॉट लैब) द्वारा “कॉग्निटिव साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं ह्यूमन ऑग्मेंटेशन : इंडस्ट्री 4.0+ के लिए भविष्य उन्मुख कौशल” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान एवं संवाद सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
मुख्य अतिथि कोटा दक्षिण विधायक श्री संदीप शर्मा ने थॉट लैब वेबसाइट का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि ध्यान एवं श्वास आधारित तकनीकें विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रभावी हैं और राजयोग व्यक्ति को परमात्मा से जोड़ने वाला एक शक्तिशाली आध्यात्मिक विज्ञान है, जो मानसिक शांति, एकाग्रता और स्वास्थ्य में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान तकनीकी विश्व विधालये के कुलपति प्रो. निमित चौधरी ने कहा कि विश्वविद्यालय थॉट लैब और भारतीय शिक्षा प्रणाली को और आगे बढ़ाएगा तथा इसे भविष्य में “प्राणवेध केंद्र” के रूप में विकसित किया जाएगा।
रजिस्ट्रार (आर .ए. एस.)भावना शर्मा ने कहा कि ऐसी थॉट लैब प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान में होनी चाहिए, क्योंकि यह विद्यार्थियों के मानसिक, भावनात्मक और बौद्धिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
डीन एफए प्रो. दिनेश बिरला ने कहा कि थॉट लैब युवाओं और जनमानस के लिए अत्यंत सकारात्मक कार्य कर रही है तथा मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-जागरूकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
राजयोगिनि बृहमा कुमारी उर्मिला दीदी ने कहा कि थॉट लैब में प्रस्तुत विषय केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर समझाए जाते हैं। उन्होंने विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय को समय की आवश्यकता बताया।
थॉट एंड इनोवेशन सेंटर की मुख्य समन्वयक प्रो. लता गिडवानी ने ई. ई .जी. जी. एस .आर.तथा अन्य बायो-फीडबैक आधारित उपकरणों की जानकारी देते हुए बताया कि इन तकनीकों के माध्यम से ध्यान, तनाव और एकाग्रता के प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है, जो भविष्य में युवाओं के समग्र विकास के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।
विशेष वक्ता प्रो. (डॉ.) सुशील चन्द्र, पूर्व वैज्ञानिक (‘जी) एवं प्रमुख, आई.एन.एम.एस.–DRDO तथा प्रोफेसर एमेरिटस, डी.एस.ई.यू., नई दिल्ली ने अपने व्याख्यान में कॉग्निटिव साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ह्यूमन ऑग्मेंटेशन, मन-बुद्धि-संकल्प शक्ति तथा आत्मचेतना पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि व्यक्ति अपने विचारों, बुद्धि और संकल्प शक्ति को समझकर आत्मचेतना के माध्यम से स्वयं की वास्तविक पहचान का अनुभव कर सकता है। इसके साथ ही ओम कोठारी इंस्टिट्यूट और एम. आई. टी. कॉलेज मै भी सुशील भाई जी के द्वारा वेयाख्यां दिये और अपने द्वारा डी.आर.डी.ओ. मैं किये गए रिसर्च के अनुभव साझा किये जिससे सभी ~~ छात्र और छात्राओ ने लाभ लिया । कार्यक्रम के दौरान मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान, भविष्य उन्मुख कौशल विकास तथा विज्ञान और चेतना के समन्वय से संबंधित गतिविधियों की जानकारी भी दी गई। अंत में अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा गया कि आर.टी.यू.का यह प्रयास “जहाँ विज्ञान चेतना से मिलता है” की अवधारणा को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।व्याख्यान में कॉग्निटिव साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ह्यूमन ऑग्मेंटेशन, मन-बुद्धि-संकल्प शक्ति तथा आत्मचेतना पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जब स्वयं को केवल शरीर नहीं, बल्कि एक चेतन आत्मा के रूप में पहचानता है, तभी वह ‘सोल कॉन्शियस’ अर्थात आत्मचेतन अवस्था का अनुभव करता है। आत्मचेतन बनने से विचार शुद्ध होते हैं, निर्णय क्षमता बेहतर होती है, तनाव कम होता है और जीवन में स्थिरता तथा सकारात्मकता आती है। उन्होंने बताया कि मन, बुद्धि और संकल्प शक्ति को सही दिशा देकर व्यक्ति आत्मा की वास्तविक अनुभूति कर सकता है तथा यही आंतरिक परिवर्तन भविष्य के तकनीकी युग में मानवता को संतुलित और मूल्य-आधारित बनाए रखेगा।”






