कोटा । राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्याशी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने हिंदू विरोधी और तुष्टिकरणवादी राजनेताओं में अचानक हिंदुत्व के प्रति उत्पन्न आस्था पर,एक बयान जारी कर दावा किया कि ” बंगाल चुनाव के बाद अधिकांश विपक्षी दलों के कई नेताओं द्वारा हिंदुत्व, भगवान श्रीराम और राम मंदिर के प्रति दिखाई जा रही आस्था, राजनीतिक स्वार्थ की रणनीति का हिस्सा मात्र है। वें हिंदूँ वोटों की ठगी करने की मानसिकता यह दिखावा कर रहे हैँ। इस झूठे आचरण का कोई वास्तविकता से कोई सरोकार नहीं है। ” उन्होंने आरोप लगाया कि ” जो राजनेता बंगाल चुनाव से पहले तक हिंदुत्व और राम मंदिर का विरोध करते थे, उपेक्षा करते थे और खुल्लेआम तुष्टिकरण की राजनीती करते थे। वे ही चुनावी फायदे के लिए अब हिंदुत्व और रामभक्ति का दिखावा कर रहे हैँ। “
सिसोदिया नें कहा की ” चंदा चोरी षड्यंत्र के पीछे भी, उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनावा को प्रभावित करने की टूलकिट रणनीति है। इस पूरे षड्यंत्र की जाँच के नतीजों का इंतजार किया जाना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि ” घोर तुष्टिकरण की राजनीती करते रहे राजनेता ही अचानक अब मंदिर और उसके प्रबंधन पर सवाल उठाकर उसे बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। करोड़ों सोशल मीडिया एकाउन्टस इस हेतु सक्रिय किए गये हैँ। ये कौन है इन्हें ही पहचाना असलियत जानना है।” उन्होंने कहा कि ” ये ही विपक्षी नेता वक्फ बोर्ड कि संपत्तियों पर कब्जे, मिशनरीयों की विदेशी फंडिंग और छल और प्रलोभन पूर्ण धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर चुप रहते हैँ। जो इनकी असलियत बेनक़ाब करती है। ” उन्होंने यह भी कहा कि ” राम मंदिर के संबंध में लगाए जा रहे आरोपों की जांच पूरी होने तक इंतजार किया जाना चाहिए। वहीं हिंदू समाज को तुष्टिकरणवादियों की राजनैतिक स्वार्थ की असलियत ध्यान में रखना चाहिए। यह सब मात्र हिंदू एकता तोड़ने के लिए किया जा रहा है। ”






