_भारत सिंह चौहान
कोटा/बूढ़ गेपरनाथ महादेव सेवा समिति, कोटा के तत्वावधान में आयोजित “द्वितीय सिंदूर अर्पण यात्रा” अपने मुख्य पड़ाव असम स्थित विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ कामाख्या देवी मंदिर पहुंची। यहाँ समिति के सदस्यों और तीर्थयात्रियों ने माँ कामाख्या के अलौकिक दर्शन कर देश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘जय माँ कामाख्या’ और ‘भारत माता की जय’ के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा। समिति द्वारा माँ के चरणों में पूरी श्रद्धा के साथ विशेष रूप से तैयार करवाई गई सोने की भव्य नथ और सिंदूर अर्पित कर राष्ट्र कल्याण की कामना की गई।
यात्रा के मुख्य उद्देश्य को लेकर समिति के पदाधिकारियों ने माँ के दरबार में देशहित की एक बड़ी अर्जी लगाई। उपाध्यक्ष लीलाधर मेहता ने बताया कि शक्तिपीठ की पावन चौखट पर शीश नवाकर सभी सदस्यों ने ‘पाक अधिकृत कश्मीर’ को पुनः भारत का अभिन्न हिस्सा बनाने की विशेष मनोकामना की। समिति का मानना है कि मां की शक्ति और आशीर्वाद से भारत का अखंड स्वरूप जल्द ही साकार होगा। इसके साथ ही, देश की सीमाओं की रक्षा में दिन-रात मुस्तैद भारतीय सेना के जवानों की सुरक्षा, दीर्घायु और उनके अदम्य साहस व पराक्रम के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की गई।
उल्लेखनीय है कि इस यात्रा की नींव गत वर्ष ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ की पृष्ठभूमि में भारतीय सेना के शौर्य को नमन करने और उनके प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए रखी गई थी। इसी कड़ी में इस वर्ष भी कोटा से शुरू हुई इस द्वितीय यात्रा ने सफलतापूर्वक असम पहुंचकर अपने धार्मिक और राष्ट्रीय कर्तव्यों को पूरा किया। माँ कामाख्या के दर्शन, पूजा-अर्चना और विशेष अर्जी लगाने की सभी रस्में पूरी होने के बाद, यात्रा दल में शामिल सभी श्रद्धालु और समिति के सदस्य अत्यंत भावुक और ऊर्जान्वित नजर आए।
माँ कामाख्या के दर्शन और इस पुनीत कार्य की सफलता के बाद अब यह यात्रा दल वापस अपने गृह क्षेत्र कोटा के लिए प्रस्थान कर चुका है। यात्रा के सफल और सुचारू संचालन में कंधे से कंधा मिलाकर साथ चल रहे समिति के सचिव रामू खारवाल, कोषाध्यक्ष हरिनारायण दीक्षित और कामाख्या यात्री रामू सेन, गोपाल कुशवाहा, प्रेमचंद सेन ने बताया कि यह यात्रा न केवल धार्मिक रूप से सफल रही है, बल्कि इसने राष्ट्रभक्ति के एक नए संदेश को भी प्रसारित किया है। कोटा पहुंचने पर समिति के सदस्यों और स्थानीय श्रद्धालुओं द्वारा यात्रा दल का भव्य स्वागत किया जाएगा।






