Monday, August 17, 2026
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सैनाणी ई पत्रिका के दूसरे अंक का लोकार्पण काव्यगोष्ठी के साथ

कोटा/ टाकरवाड़ा में ‘ सैनाणी ‘ ई पत्रिका का लोकार्पण महादेवझरी टाकरवाड़ा के श्री चौथ माता मंदिर पर हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कैलाश नाथ योगी ने की। मुख्य अतिथि साहित्यकार  देवकी दर्पण,विशिष्ट अतिथि श्री परमानंद गोस्वामी एवं श्री मुकुट बिहारी मालव रहे।

मुख्य अतिथि  देवकी दर्पण ने कहा कि साहित्यिक पत्रिका निकालना कितना कठिन काम है। मायड़ भाषा के लिए यह काम और भी ज्यादा महत्वपूर्ण है।

मायड़ भाषा साहित्य, संस्कृति मंच टाकरवाड़ा एवं हाडीराणी राजस्थानी भाषा साहित्य संस्कृति समिति रोटेदा के संयुक्त तत्वावधान आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। सरस्वती वंदना एवं अतिथियों के सम्मान के पश्चात प्रधान संपादक श्री देवकी दर्पण द्वारा संपादित राजस्थानी ई पत्रिका ‘सैनाणी’ के दूसरे अंक का लोकार्पण किया गया। संपादक श्री देवकी दर्पण एवं श्री लोकेश आजाद ने सैनाणी पत्रिका ई के बारे में जानकारी दी।

तत्पश्चात काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। काव्य गोष्ठी में कवि सत्यप्रकाश गौतम ने अपनी हास्य – व्यंग्य की रचनाओं से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया – ‘गाडी के नीचे भाटो’ तथा ‘लाडी खावै दनभर म्हारा कान जी ‘ रचनाएं सुनाई। युवा कवि मनीष मेहरा ने ‘चामल की तीर’,’काचो टापरो’ रचनाएं सुनाकर दाद बटोरी। गीतकार परमानंद गोस्वामी ने एक श्रृंगार गीत -‘ढोला सूनो पड़्यो जी सिणगार ..’ सुनाकर वाहवाही लूटी। साथ ही एक व्यंग्य ‘किन्नर को चुनाव ‘ भी सुनाया। कवि मुकुट बिहारी मीणा ने हाड़ौती गीत रचना ‘पावणा आया देखबा नै..’ सुनाकर वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। वरिष्ठ कवि महावीर प्रसाद मालव ‘मार्मिक ‘ ने ‘माटीड़ो सूरज’, ‘मजूर्या’ तथा विरह के राजस्थानी दोहे भी सतरन्नुम सुनाकर श्रोताओं पर अपनी छाप छोड़ी। वरिष्ठ गीतकार  रामस्वरूप रावत ने ‘ मायड़ म्हारी कतनी प्यारी’, ‘इंदर सुणले म्हांकी पुकार’ गीत रचनाएं सस्वर सुनाकर खूब प्रसंशा पाई। कवि लोकेश ‘आजाद ‘ ने ‘शंकर जी थांका दरसण पाऊं म्हूं ‘ तथा ‘ अतरी सी अरज स्वीकार करो ‘ गीत तरन्नुम के साथ प्रस्तुत कर सबको प्रभावित किया। वरिष्ठ कवि रामकिशन सुमन ने कुछ कटाक्ष एवं एक गीत ‘म्हारा लसणलाल की चरचा चाली च्यारूंमेर ‘ सुनाकर तालियां बटोरी। आरोध गायक संत कवि रामदेव मेघ ने युवा पीढ़ी में प्रचलित गुटखा की बुरी लत पर एक कविता सुनाई। वरिष्ठ कवि – साहित्यकार श्री देवकी दर्पण ने ‘ भोलेनाथ’, ‘ सूरज लाई घणी फांकर्यो हलक सूखर्यो प्राणी को। मरै तसायां घणा पखेरू भरां परिंडो पाणी को.. सुना कर गोष्ठी को नई ऊंचाइयां दी।

महंत बाबा कैलाशनाथ योगी ने आशीर्वाद स्वरूप दो शब्द प्रस्तुत किए। उन्होंने पात्रता एवं वस्तु का स्वरूप निरूपण किया।

अंत में सबका आभार प्रदर्शन करते हुए कवि साहित्यकार सीएल सांखला ने मां एवं सांझ के सूर्य पर रचनाएं प्रस्तुत की।  मुकुट बिहारी मालव एवं श्री चौथ माता मंदिर सेवा समिति अध्यक्ष शिवराज गोचर ने ने गोष्ठी में प्रस्तुत रचनाओं की प्रशंसा की।

काव्य गोष्ठी का सफल संचालन कवि लोकेश ‘ आजाद ‘ ने किया।

 

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