कोटा/दृढ़ संकल्प, अथक मेहनत और अटूट हौसले की मिसाल बने पैरा एथलीट सुनील कुमार साहू ने एक बार फिर अपने संघर्ष और उपलब्धियों से सभी का दिल जीत लिया है। इंटरनेशनल सिल्वर मेडलिस्ट और इंटरनेशनल यूथ आइकॉन अवॉर्डी सुनील ने राष्ट्रीय खेलों में लगातार 6 मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। पिछले 3 वर्षों में वे कुल 20 मेडल अपने नाम कर चुके हैं, जिनमें 12 स्वर्ण पदक शामिल हैं।
खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राजस्थान सरकार के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने उन्हें आमंत्रित कर मेडल पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान मंत्री नागर ने उनके संघर्ष और उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्हें अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म—फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर बधाई दी तथा भविष्य में पैरालंपिक खेलों के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
सम्मान समारोह के दौरान सुनील ने अपनी भावुक जीवन यात्रा साझा करते हुए बताया कि एक भीषण दुर्घटना में उन्होंने अपने पिता, भाई और बहन को खो दिया। इसी हादसे में उनके दोनों हाथ और एक पैर भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके कारण वे करीब 2 वर्षों तक बिस्तर पर रहे। इतना ही नहीं, खेलों में भी लगातार 5 वर्षों तक असफलताओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
अपने अटूट आत्मविश्वास और मां के सहयोग से सुनील ने अपनी कमजोरी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। आज वे न सिर्फ देश का नाम रोशन कर रहे हैं, बल्कि लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा,
“सुनील कुमार साहू जैसे खिलाड़ी समाज के लिए प्रेरणा हैं। इन्होंने यह साबित किया है कि कठिन परिस्थितियां भी हौसलों को नहीं रोक सकतीं। जो लोग छोटी-छोटी परेशानियों में हार मान लेते हैं, उन्हें सुनील से सीख लेनी चाहिए।”
आज सुनील का सपना है कि वे पैरालंपिक खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम विश्व स्तर पर गौरवान्वित करें। उनका जीवन इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मुश्किल राह को नहीं रोक सकती।
यह कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि उस जज्बे की है जो हर हार को जीत में बदलने का हौसला रखता है।






