कोटा | स्वर्गरजत मार्केट के बढ़ाए गए रखरखाव शुल्क को लेकर व्यापारी वर्ग में असंतोष बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रमेश सोनी ने स्पष्ट कहा कि सदस्यों से दो गुना या उससे अधिक राशि लेना पूरी तरह अनुचित निर्णय है और इससे व्यापारियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि जब बाजार का संचालन उनकी देखरेख में था, तब मात्र 300 रुपये प्रति माह के रखरखाव शुल्क से ही संस्था सुचारू रूप से चल रही थी। उस समय न केवल सभी आवश्यक खर्च पूरे हो रहे थे, बल्कि संस्था के कोष में लगातार वृद्धि भी हो रही थी। उन्होंने दावा किया कि इसी संतुलित व्यवस्था के चलते लगभग 20 लाख रुपये की राशि बैंक में जमा करवाई गई थी।
रमेश सोनी ने आंकड़ों के साथ समझाते हुए कहा कि 300 रुपये प्रति माह के हिसाब से भी संस्था की आय करीब 1.30 लाख रुपये मासिक तक पहुंच रही थी, जबकि कुल खर्च लगभग 77 हजार रुपये ही था। इस प्रकार हर महीने लगभग 53 हजार रुपये की बचत संस्था के कोष में जुड़ रही थी।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब कम शुल्क में संस्था बेहतर तरीके से संचालित हो रही है और कोष में निरंतर वृद्धि हो रही है, तो फिर शुल्क को दोगुना या उससे अधिक बढ़ाने का क्या औचित्य है? उन्होंने इसे व्यापारियों पर “अनावश्यक वित्तीय दबाव” बताते हुए निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की।






