कोटा के मेघराज शर्मा और सरोज शर्मा की बेटी, आकांक्षा शर्मा ने 19,341 फीट की ऊँचाई पर स्थित अफ्रीका की सबसे ऊँची चोटी माउंट किलिमंजारो पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इससे पहले उन्होंने पिछले वर्ष सितंबर माह में यूरोप की सबसे ऊँची चोटी माउंट एलब्रुस पर भी चढ़ाई की थी। ये दोनों चोटियाँ विश्व की प्रतिष्ठित ‘सेवन समिट्स’ में शामिल हैं।
पेशे से सिविल इंजीनियर आकांक्षा दोनों शिखरों पर चढ़ाई करने वाली कोटा की संभवतः पहली पर्वतारोही हैं। साथ ही वे ऐसा करने वाली राजस्थान की चुनिंदा पर्वतारोहियों में भी शामिल हो गई हैं।
माउंट किलिमंजारो को विश्व का सबसे ऊँचा ‘फ्री-स्टैंडिंग माउंटेन’ माना जाता है। अर्थात बेस से शिखर तक की ऊँचाई के लिहाज़ से यह दुनिया की किसी भी अन्य पर्वत चोटी से अधिक है। भूमध्य रेखा के समीप स्थित होने के कारण इसकी भौगोलिक परिस्थितियाँ अन्य पर्वत श्रृंखलाओं से भिन्न हैं, जिसके चलते शिखर पर ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है।
आकांक्षा को भी चढ़ाई के दौरान ऑक्सीजन की कमी का सामना करना पड़ा। उन्हें साँस लेने में कठिनाई हो रही थी और एक-एक कदम बढ़ाना भी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और विषम परिस्थितियों में भी चढ़ाई पूरी की। चढ़ाई के दौरान तापमान – 12 डिग्री था और हवा 20 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही थी।
चोटी पर पहुँचने के बाद आकांक्षा ने कश्मीरी कानी साड़ी पहनकर अपनी सांस्कृतिक पहचान को दर्शाया। उन्होंने बताया कि यह परिधान उन्हें अपने भारतीय होने का एहसास कराता है और कश्मीर से उनका विशेष लगाव है। वे अक्सर कश्मीर जाती रहती हैं।
आकांक्षा ने कहा कि पर्वतारोहण के लिए उनकी कर्मभूमि कश्मीर रही है। उन्होंने माउंटेनियरिंग के बेसिक और एडवांस कोर्स वहीं से किए हैं और कश्मीर की कई चोटियों पर अभ्यास भी किया है। इसी कारण उन्होंने निर्णय लिया कि किलिमंजारो की चोटी पर पहुँचने के बाद वे कश्मीर से लाई गई कानी साड़ी पहनेंगी। उन्होंने यह साड़ी टी-शर्ट और लोअर के ऊपर पहनी, जिसे उन्होंने एक अत्यंत सुखद अनुभव बताया।
यह अभियान आकांक्षा ने सफारी टच तंजानिया कंपनी के साथ पूरा किया। इस अभियान में वे अपने समूह की एकमात्र पर्वतारोही थीं, जबकि उनके साथ कंपनी का मैनेजर और एक ट्रेक लीडर मौजूद था।
क्या है ‘सेवन समिट्स’
विश्व के सातों महाद्वीपों की सबसे ऊँची चोटियों को ‘सेवन समिट्स’ कहा जाता है। पर्वतारोहण की दुनिया में इन सभी चोटियों पर चढ़ाई करना एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है। इसमें यूरोप की माउंट एलब्रुस और अफ्रीका की माउंट किलिमंजारो भी शामिल हैं।
कैसे की तैयारी
आकांक्षा ने बताया कि माउंट किलिमंजारो की तैयारी के लिए उन्होंने नियमित रूप से रनिंग की, जिम में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की और सीढ़ियों पर चढ़ने-उतरने का अभ्यास किया। वे पाँचवीं मंज़िल पर रहती हैं और बिल्डिंग के बाहर की सीढ़ियों पर अभ्यास करने से उन्हें विशेष लाभ मिला। इसके अलावा उन्होंने प्राणायाम का अभ्यास भी किया, जिससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में मदद मिली।
पर्वतारोहण मेरा पैशन
पेशे से सिविल इंजीनियर आकांक्षा शर्मा के लिए पर्वतारोहण एक जुनून है। उन्होंने जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग से माउंटेनियरिंग के बेसिक और एडवांस कोर्स के साथ-साथ स्कीइंग का बेसिक कोर्स भी किया है।
आगे का लक्ष्य
आकांक्षा का सपना है कि वे भविष्य में सभी ‘सेवन समिट्स’ पर चढ़ाई करें। इसके लिए उन्होंने कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की है। उनका कहना है कि भारत के हिमालय क्षेत्र और अन्य पर्वत श्रृंखलाओं में भी कई ऐसी चोटियाँ हैं, जिन्हें वे चढ़ना चाहती हैं।






