रिमझिम रिमझिम पड़ें फुहारे’।
✍️डॉ रघुराज सिंह कर्मयोगी कोटा
रिमझिम रिमझिम पड़ें फुहारैं । …1
रिमझिम रिमझिम पड़ें फुहारैं,
बदरा आइ रहे कारे कारे।
प्रियतम गए संदेशा लाऔ,
बिरहन बोली जा रे जा रे।
रिमझिम रिमझिम झरें फुहारैं……2
निंदिया लौट जात अंखियों सों,
आंसू झरि रहे मोटे बारे।
बिटिया रोवे दिन और रैना,
बिटुआ सिसकत घर के द्वारे
रिमझिम रिमझिम झरें फुहारैं।….3
कोयल की मीठी बोली
तक अंगारे बरसावत है।
बंजमारे पपिहा की पी पी,
हिरदे में शूल चुभावत है।
रिमझिम रिमझिम झरें फुहारैं।…4
कलियों ने घूंघट खोला है,
ताल तलैया हैं मतवारे।
पावस बैरिन घुमड़ घुमड कर,
तन मदनावै आ रे आ रे
रिमझिम रिमझिम झरें फुहारैं….5
रिमझिम रिमझिम पड़ें फुहारे’-डॉ रघुराज सिंह कर्मयोगी






