Friday, July 24, 2026
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थर्मल कर्मियों ने दिया मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन 

थर्मल कर्मियों ने दिया मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन

राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के मध्य हुए संयुक्त उद्यम की प्रक्रिया को निरस्त करवाने तथा निगम की वर्तमान स्थापित यूनिटों को निजी संयुक्त उद्यम प्रक्रिया रुकवाने की मांग को लेकर निगम कर्मियों ने सभी पावर प्लांट में बुधवार को जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिए।

संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक राकेश गुप्ता ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि सरकार व निगम द्वारा सरकार के स्वामित्व वाले विभिन्न कॉरपोरेशन निगम को संयुक्त उद्यम बनाए जाने के विरोध में हम एक महीने से विरोध कर रहे हैं । ज्ञापन में स्पष्ट बताया कि वर्ष 2000 में राजस्थान की तत्कालीन सरकार ने विद्युत का घाटा कम करने के लिए राजस्थान राज्य विद्युत बोर्ड का विघटन करके पांच विद्युत कंपनियां बनाई थी किंतु सरकार का यह प्रयोग विफल रहा। विद्युत कंपनियां बनाने के बाद इनका बुनियादी ढांचा विकसित करने में भारी भरकम खर्च हुआ तथा उच्च स्तरीय पदों में प्रशासनिक बढ़ोतरी की गई। परिणाम स्वरुप घाटा बढ़ता ही गया । वर्तमान सरकार इसकी समीक्षा या अवलोकन किए बिना नए प्रयोग की ओर बढ़ रही है। जो पुनः घाटे का सौदा साबित हो सकता है।

गुप्ता ने बताया कि हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि देश के जिन राज्यों में संयुक्त उद्यम बनाए गए हैं उनका मूल्यांकन व ऑडिट करवाई जाए संयुक्त उद्यम होने से राजस्थान में युवाओं के रोजगार के अवसर भी कम हो सकते हैं वहीं बिजली की लागत भी बढ़ सकती है। जिसका सीधा असर राजस्थान की आम जनता पर पड़ेगा। हम सभी के लिए असमंजस की स्थिति है क्योंकि राज्य सरकार व उत्पादन निगम द्वारा संयुक्त उद्यम की पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखा गया है। इससे अधिकारियों व कर्मचारियों में अविश्वास पैदा हुआ है तथा सभी में आक्रोश व्याप्त है । यह भी अंदेशा है कि भविष्य में हमारी पदोन्नतियां बाधित हो जाएगी तथा थर्मल कार्मिकों को समय पर वेतन पेंशन अन्य परिलाभ जो वर्तमान में मिल रहे हैं वह मिलना दुभर हो जाएगा।

गुप्ता ने कहा कि बिजली की मांग के आधार पर एवं आगामी वर्षों की खपत को देखते हुए नए बिजली के पावर प्लांट लगाने का के राज्य सरकार के फैसले का संयुक्त संघर्ष समिति स्वागत करती है साथ ही यह भी अनुरोध करती है कि इन पावर प्लांट पर मलिकाना हक राजस्थान सरकार का ही रहे, ना की संयुक्त उद्यमो का, जिससे राज्य की आम जनता को सस्ती बिजली आपूर्ति हो सके। गुप्ता ने संघर्ष समिति की आगामी योजना बताते हुए कहा कि विद्युत उत्पादन निगम के सभी पावर प्लांट में संघर्ष समिति द्वारा 16 नवंबर को स्थानीय विधायक को इस बाबत ज्ञापन दिया जाएगा

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