कोटा वीर सावरकर नगर में स्थित मदर टेरेसा के मंगल कलश सभागार में श्री आर के पुरम परमार्थ सेवा समिति कोटा के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में डाक्टर प्रभात सिंघल की कृति “नारी साहित्यिक चेतना की उड़ान” का लोकार्पण मंचस्थ अतिथियों द्वारा किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि ईश्वर लाल सैनी निदेशक सुमंगलम ग्रुप , अध्यक्षता रेणु गौड़ अध्यक्ष अंतरराष्ट्रीय गुर्जर गौड़ समाज, मार्गदर्शक हिंदी व राजस्थानी भाषा के वरिष्ठ समीक्षक जितेन्द्र निर्मोही, संरक्षक योगेन्द्र शर्मा ( निदेशक, शिशु ज्ञान भारती संस्थान, कोटा) ,मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार एवं समीक्षक विजय जोशी, बीज व्यक्तव्य डाक्टर दीपक श्रीवास्तव( पुस्तकालयध्यक्ष, सम्भागीय पुस्तकालय कोटा), विशिष्ट अतिथि स्नेहलता शर्मा (वरिष्ठ साहित्यकार) , रेखा पंचोली ( अध्यक्ष आर्यन लेखिका मंच), वरिष्ठ साहित्यकार जयपुर से पधारे गोपाल प्रभाकर एवं के एल भ्रमर मंच पर शोभायमान थे।
कोई भी कृति अपने समय की संस्कृति को रुपायित करती है। आदिकाल में लिखी गई कृतियां जो बालावबोध, रुक्का ख्यात आदि के रुप में लिखी गई उस समय की सभ्यता, संस्कृति और समाज को बताती है। आज की लोकार्पित कृति “नारी साहित्यिक चेतना की उड़ान” भी कालांतर में अपने परिवेश को बतायेगी।लेखक डॉ प्रभात सिंघल ने यह कृति कितने ही संदर्भों से गुजरते हुए लिखी है।यह नारी विमर्श की शानदार कृति है सच तो यह है कि यह देश के हाड़ौती अंचल में 81 लेखिकाओं के सृजन को केंद्र में रखकर लिखी गई है।जो देश के अन्य प्रांतों और अंचलों को ऐसा सृजन करने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने यह वक्तव्य मंगल कलश सभागार में आयोजित श्री आर के पुरम कोटा परमार्थ समिति,सुमंगलम ग्रुप और शिशु भारती शिक्षण संस्थान कोटा के सौजन्य से आयोजित डॉ प्रभात सिंघल की कृति “नारी चेतना की साहित्यिक उड़ान” के लोकार्पण के समय दिया। उन्होंने कहा यह कृति नहीं अपने समय का दस्तावेजीकरण है।
समारोह के मुख्य अतिथि ईश्वर लाल सैनी निदेशक सुमंगलम ग्रुप ने कहा कि विचारणा, धारणा, कल्पना स्त्रैण शब्द है इनकी शाब्दिक अनुभूति से रचनाकर्म होता है।यह कृति अपने समय के नारी लेखन की जागरूकता की परिणति है। आज़ के इस आयोजन में लेखिकाओं का सैलाब उमड़ पड़ा हो जैसा लग रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही रेणु गौड़ अध्यक्ष अंतरराष्ट्रीय गुर्जर गौड़ समाज ने कहा कि “महिला चेतना और उनके सहयोग की बात हर मंच से कही जाती है। लेखक की कृति का लोकार्पण समारोह बता रहा है कि लेखिकाओं की चेतना क्या होती है। विभिन्न अंचलों से आई विभिन्न विधाओं को लिखने वाली लेखिकाओं की यह शतकीय साझेदारी मेरे जीवनकाल में कहीं देखने को नहीं मिली इसलिए आज़ का आयोजन महत्वपूर्ण है।”
नहुष व्यास के संचालन में समारोह दीप प्रज्वलन के बाद हाड़ौती कवि किशन वर्मा की सरस्वती वंदना से प्रारंभ हुआ। स्वागत उद्बोधन में स्वागताध्यक्ष पी पी गुप्ता ने कहा कि “आज का यह मंच विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों का मंच है फिर भारी मात्रा में लेखक और लेखिकाओं की भागीदारी में इसका हृदय से स्वागत करता हूं। आपका यहाँ होना हमारे लिए सौभाग्य की बात है, लोकार्पण का आयोजन हमारे लिए महत्वपूर्ण है, हमें वरिष्ठ साहित्यकारों से बहुत कुछ सिखने का अवसर मिलेगा। ”
इसके बाद मंच का संचालन स्नेहलता शर्मा ने संभालकर समारोह को बौध्दिक संपदा से सम्पन्न करने के लिए बीज वक्तव्य के लिए डॉ दीपक श्रीवास्तव को आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि “अब कोटा नगर शैक्षिक नगरी के साथ साथ साहित्यकारों का नगर भी कहलाने लगा है जिसका बहुत कुछ श्रेय जितेन्द्र निर्मोही को जाता है जिन्होंने नव युवकों के साथ साथ महिलाओं को भी नव लेखन के लिए प्रेरित किया। आज़ की कृति की नींव भी इनके सानिध्य में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2024 को रंगनाथन सभागार में रखी गई थी। जिससे प्रेरित हो डॉ प्रभात सिंघल ने इस कृति का दस्तावेजीकरण किया है। जितेन्द्र निर्मोही ने युवाओं को हमेशा प्रौत्साहित किया है। महिलाओं के साहित्य को एक साथ एक पुस्तक में लाकर डाक्टर प्रभात सिंघल साहब ने यह कार्य किया है।वरिष्ठ साहित्यकार के साथ युवा कवियत्री को भी शामिल किया है।” रचनाकार डॉ प्रभात सिंघल ने इस कृति की रचना प्रक्रिया और सहयोगी लेखिकाओं के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा” इस कृति के संदर्भ में देश भर के विद्वान बंधुओं विदुषी लेखिकाओं की जो प्रतिक्रिया आ रही है उससे मैं अचंभित हूं सोच रहा हूं क्या मैंने ऐसी कृति लिख दी क्या?” कार्यक्रम संयोजक नहुष व्यास ने बताया कि मुख्य वक्ता विजय जोशी ने कहा कि” यह कृति समकालीन महिला लेखन सन्दर्भों में वह सृजनात्मक पड़ाव है, जो आने वाले समय में हाड़ौती अंचल की महिला लेखन की पूर्व पीठिका निर्मित करता है। लेखक ने अपनी समीक्षात्मक दृष्टि, सर्वेक्षणात्मक कौशल और शोधात्मक वृत्ति के साथ इन महिला रचनाकारों के लेखन को उनकी विधा, भाषा, शैली, विषयवस्तु , विशेषता, इनकी सामाजिक उपयोगिता, लेखन का मर्म और सृजन के सामाजिक सरोकारों का विश्लेषण रचनाओं का समुचित उल्लेख करते हुए उकेरा है। वहीं रचना के भीतर के तत्वों को विश्लेषित करते हुए उसके मर्म को उजागर कर उनके व्यक्तित्व को समकालीन सृजन सन्दर्भों के समक्ष प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया है।”
समारोह को शिशु भारती शिक्षण संस्थान कोटा के निदेशक योगेन्द्र शर्मा ने कहा कि “यह कृति लोकार्पण समारोह एक महिला लेखन के आंदोलन जैसा है एक दिन इन 81 महिलाओं के लेखन से इक्यासी हजार महिलाओं में लेखन की चेतना जागृत होगी।” जयपुर से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार गोपाल प्रभाकर,के एल भ्रमर,रेखा पंचोली अध्यक्ष आर्यन लेखिका मंच कोटा , स्नेहलता शर्मा अध्यक्ष साहित्य एवं कला संस्थान कोटा ने संबोधित किया। आयोजन के अन्त में कार्यक्रम समन्वयक एवं साहित्यकार महेश पंचौली ने आगन्तुक अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
इस समारोह में प्रदेश भर से आई डॉ वीणा अग्रवाल, डॉ रेखा शर्मा, श्यामा शर्मा, श्वेता शर्मा, डॉ अपर्णा पाण्डेय, डॉ हिमानी भाटिया, डॉ वैदेही गौतम, इंदुबाला जी, अनुराधा शर्मा, गरिमा राकेश, रेणु सिंह, संजु जी, पल्लवी न्याती, शशि जैन, युगल सिंह, कृष्णा कमसिन, मन्जु रश्मि, साधना शर्मा,, योगमाया शर्मा, डॉक्टर युगल सिंह, डॉक्टर शशि जैन, सुमन लता शर्मा, डॉक्टर संगीता सिँह, संजू श्रृंगी,अदिति शर्मा, डॉक्टर अर्चना शर्मा, बूंदी से सुमनलता शर्मा ,डाॅ सुलोचना शर्मा ,बारां से मधुबाला जैन, राधा तिवारी कोटा से प्रार्थना भारती , डाॅ सुशीला जोशी ,अर्चना शर्मा ,डाॅ शशिबाला जैन,अल्पना गर्ग,अक्षय लता , साधना शर्मा ,मंजु रश्मि ,इंदुबाला शर्मा , शोभा सक्सेना ,पल्लवी दरक न्याति सहित लगभग नब्बे के करीब मातृशक्ति लेखिकाओं ने भाग लिया साथ ही नगर के साहित्यकार भगवती प्रसाद गौतम, विजय शर्मा, विजय महेश्वरी, रामस्वरूप मूंदड़ा,जे पी मधुकर, प्रेम शास्त्री, हेमराज सिंह, पत्रकार के डी अब्बासी, अख्तर खान, हलीम आयना, राजेन्द्र पंवार, बद्री लाल दिव्य, नन्दकिशोर अनमोल, आयोजन की शोभा बढ़ा रहे थे। यह जानकारी युवा व्यंग्य कार एवं कार्यक्रम संयोजक नहुष व्यास दी।






