*राष्ट्रपिता महात्मा गांधी*
आओ बच्चों दिखला दूँ मैं, आजादी की वो आँधी।
हिम्मत का हिलता बरगद था,
ऐसे में आए गाँधी।
रोग गुलामी का भारत में ,
रोगी भारतवासी था।
देश-प्रेम की अलख जगाई,
वह मोहन संन्यासी था।
अंग्रेज बने दानव जैसे,
पीड़ित हर हिंदुस्तानी।
धर्म, अहिंसा माने बापू,
सोच यही मन में ठानी।
पैर धुलाए हर जन के थे,
आँसू पोंछे आँखों से।
हरिजन उड़ते पंछी जैसे,
बंधन काटे पाँखो से।
गोल-गोल पहने चश्मा,
कल में जिससे झाँका था।
आंदोलन की राह ज़रूरी,
गाँधी जी ने आँका था।
धरती होगी अंबर होगा,
अमर रहेंगे बापू जी।
देश भले ही होगा विकसित,
संग रहेंगे बापू जी।

राम शर्मा ‘काप्रेन’
कोटा






