मोदी की गारंटी, ओम बिरला का जनसेवा संकल्प और भजनलाल का सुशासन: जनकल्याण की रोशनी से जगमगाती दीपावली
दीपावली विशेष संपादकीय
✍️ डॉ. नयन प्रकाश गांधी
पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट, युवा मैनेजमेंट विश्लेषक एवं मीडिया स्तंभकार
दीपावली केवल दीप जलाने, घर सजाने और उत्सव मनाने का पर्व नहीं है। यह अंधकार से प्रकाश, निराशा से आशा और अभाव से समृद्धि की ओर बढ़ने का सांस्कृतिक संदेश भी है। भारतीय परंपरा में दीपावली का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होता है, जब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में भी खुशियों का उजाला पहुंचे। किसी जरूरतमंद परिवार के घर में चूल्हा जले, किसी बेटी की शिक्षा का मार्ग प्रशस्त हो, किसी बुजुर्ग को उपचार मिले और किसी किसान को आर्थिक सुरक्षा का भरोसा हो,यही जनकल्याण की वह रोशनी है, जो त्योहार को सामाजिक अर्थ प्रदान करती है।आज भारत विकास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समावेशन के नए लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की नीतियां, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की संसदीय भूमिका और कोटा-बूंदी क्षेत्र में प्रोत्साहित सामाजिक पहलें तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं अपनी-अपनी भूमिका निभा रही हैं। इन तीनों स्तरों पर एक साझा अपेक्षा दिखाई देती है—विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे और शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना हो।
मोदी की गारंटी: कल्याणकारी योजनाओं से आत्मनिर्भर भारत की दिशा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पिछले वर्षों में गरीब, किसान, महिला, युवा, श्रमिक और वंचित वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया है। सरकार की नीतियों में सामाजिक सुरक्षा, वित्तीय समावेशन, आवास, स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और किसानों की आय को सहयोग देने जैसे विषय प्रमुख रहे हैं।प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से पात्र किसान परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इस योजना का उद्देश्य खेती-किसानी से जुड़ी आवश्यकताओं में किसानों को सहयोग देना है। वहीं प्रधानमंत्री जनधन योजना ने बैंकिंग सेवाओं से वंचित रहे लोगों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। बैंक खाते, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और डिजिटल भुगतान की व्यवस्था ने सरकारी सहायता को लाभार्थियों तक पहुंचाने के रास्ते को अधिक पारदर्शी बनाने में योगदान दिया है।प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने गरीब परिवारों की महिलाओं को स्वच्छ रसोई ईंधन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में निर्धारित सीमा तक कैशलेस उपचार की सुविधा दी जाती है। इन योजनाओं का व्यापक महत्व केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है; ये सम्मानजनक जीवन, स्वास्थ्य सुरक्षा और सामाजिक अवसरों के विस्तार से भी जुड़ी हैं।
सरकार की नीतियों में महिला सशक्तीकरण और युवाओं के कौशल विकास को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। कौशल विकास, स्टार्टअप प्रोत्साहन, डिजिटल इंडिया और उद्यमिता से जुड़ी पहलों ने युवाओं के सामने रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसरों की संभावनाएं खोली हैं। हालांकि किसी भी योजना की वास्तविक सफलता उसके बजट या घोषणा से नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन और पात्र व्यक्ति तक लाभ पहुंचने से मापी जानी चाहिए।‘मोदी की गारंटी’ का राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श में अपना महत्व है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी गारंटी की विश्वसनीयता निरंतर कार्य, पारदर्शिता और परिणामों से मजबूत होती है। दीपावली के अवसर पर यही अपेक्षा है कि विकास की यह यात्रा अधिक समावेशी बने और देश का प्रत्येक नागरिक प्रगति में भागीदार बने।
ओम बिरला: संसदीय गरिमा के साथ जनसेवा और सामाजिक सहभागिता
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का सार्वजनिक जीवन संसदीय दायित्वों के साथ कोटा-बूंदी क्षेत्र में सामाजिक सहभागिता और जनसेवा की पहलों से भी जुड़ा रहा है। लोकसभा अध्यक्ष के रूप में उनका सर्वोच्च संस्थागत दायित्व सदन की गरिमा, संसदीय परंपराओं, लोकतांत्रिक संवाद और सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करना है। संसद की कार्यवाही को निष्पक्षता, अनुशासन और सार्थक चर्चा के साथ संचालित करना इस संवैधानिक पद की मूल जिम्मेदारी है।इसके साथ ही कोटा-बूंदी क्षेत्र में उनके द्वारा प्रोत्साहित सामाजिक पहलों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और जरूरतमंदों की सहायता जैसे विषयों को सार्वजनिक सहभागिता से जोड़ने का प्रयास किया है। सुपोषित मां अभियान इसका उल्लेखनीय उदाहरण है। 29 फरवरी 2020 को कोटा से प्रारंभ इस अभियान के पांच वर्षों में एक लाख से अधिक पोषण किट वितरित किए जाने, 18 हजार से अधिक लाभार्थियों तक पहुंचने और 800 से अधिक वितरण शिविर आयोजित किए जाने की जानकारी लोकसभा सचिवालय ने मार्च 2025 में दी थी। अभियान के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को पोषण किट के साथ स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। बूंदी में इसके तीसरे चरण के शुभारंभ के समय 1,800 से अधिक गर्भवती महिलाओं को लाभ पहुंचाने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया।मेरी पाठशाला, मेडिसिन बैंक, अस्पताल ऑन व्हील्स, एक मुट्ठी अन्न राहत अभियान, कंबल निधि और सहायक उपकरण वितरण जैसी पहलें भी स्थानीय स्तर पर सामाजिक सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करती हैं। इन प्रयासों का महत्व इस बात में है कि जनप्रतिनिधित्व केवल राजनीतिक या संसदीय दायित्व तक सीमित न रहे, बल्कि समाज की वास्तविक आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील सहभागिता भी बनाए रखे।ओम बिरला की इन पहलों को सरकारी योजनाओं के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक सहयोग और जनभागीदारी से जुड़ी पहलों के रूप में देखना अधिक उचित है। यही अंतर लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थागत जिम्मेदारी और सामाजिक सेवा के अलग-अलग स्वरूपों को स्पष्ट करता है।
भजनलाल शर्मा का सुशासन: विकसित राजस्थान की ओर
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने विकसित राजस्थान @2047 की परिकल्पना के अंतर्गत स्वास्थ्य, महिला एवं बालिका सशक्तीकरण, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा और आर्थिक समावेशन जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। राज्य की आर्थिक समीक्षा 2025-26 इन योजनाओं और उनकी प्रगति को समझने का एक महत्वपूर्ण आधिकारिक दस्तावेज है।महिला एवं बालिका सशक्तीकरण की दिशा में मुख्यमंत्री लाड़ो प्रोत्साहन योजना उल्लेखनीय है। इसके अंतर्गत पात्र बालिकाओं के लिए सात चरणों में कुल 1.50 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान किया गया है। यह पहल बालिका के जन्म से लेकर शिक्षा और भविष्य की सुरक्षा तक आर्थिक सहयोग की अवधारणा को आगे बढ़ाती है। किसी भी समाज की प्रगति का आकलन इस बात से भी होता है कि वहां बेटियों को कितने अवसर, सुरक्षा और सम्मान प्राप्त हैं।स्वास्थ्य के क्षेत्र में मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना राज्य की महत्वपूर्ण पहल है। इसके अंतर्गत पात्र परिवारों को 25 लाख रुपये तक कैशलेस उपचार की सुविधा का प्रावधान है। राज्य की आर्थिक समीक्षा के अनुसार दिसंबर 2025 तक लगभग 1.36 करोड़ परिवार इस योजना में पंजीकृत थे। स्वास्थ्य सुरक्षा का यह प्रयास आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गंभीर बीमारी के समय उपचार संबंधी आर्थिक बोझ से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में 6 जनवरी 2024 को प्रारंभ की गई श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना भी उल्लेखनीय है। इसके अंतर्गत जरूरतमंद लोगों को आठ रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है और राज्य सरकार की ओर से प्रति थाली 22 रुपये का अनुदान दिया जाता है। इसका मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक अभाव किसी व्यक्ति की भोजन संबंधी आवश्यकता में बाधा न बने। शहरों में श्रमिकों, जरूरतमंदों और कम आय वाले परिवारों के लिए ऐसी व्यवस्था सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान (दवा) योजना और मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान (जांच) योजना के माध्यम से सरकारी चिकित्सा संस्थानों में आवश्यक दवाएं और जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था जारी है। ये योजनाएं पहले से संचालित सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की निरंतरता और विस्तार का हिस्सा हैं। राज्य की आर्थिक समीक्षा के अनुसार दिसंबर 2025 तक निःशुल्क दवा योजना से 15.73 करोड़ मरीज लाभान्वित हुए और निःशुल्क जांच योजना के अंतर्गत 13.55 करोड़ जांचें की गईं। इन आंकड़ों से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक उपयोग का संकेत मिलता है।सुशासन का वास्तविक अर्थ केवल नई योजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, समयबद्ध सेवा, गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। विकसित राजस्थान का संकल्प तभी सार्थक होगा, जब गांव, ढाणी, कस्बे और शहर—हर स्थान पर पात्र व्यक्ति को बिना अनावश्यक बाधा के योजनाओं का लाभ मिले।

जनकल्याण ही दीपावली का वास्तविक प्रकाश
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में केंद्र और राज्य सरकारों की जिम्मेदारियां अलग-अलग हैं, जबकि जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की भूमिका भी अपने विशिष्ट स्वरूप में महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत दिशा और व्यापक योजनाओं का संचालन करती है। राज्य सरकारें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं को लागू करती हैं और सार्वजनिक सेवाओं को नागरिकों तक पहुंचाती हैं। वहीं जनप्रतिनिधियों की सामाजिक पहलें समुदायों में सहयोग, जागरूकता और सहभागिता को बढ़ावा दे सकती हैं।इन सभी प्रयासों की सफलता का अंतिम पैमाना नागरिक का जीवन है। यदि किसान को समय पर सहायता मिले, महिला को सम्मान और सुरक्षा मिले, बेटी को शिक्षा का अवसर मिले, गरीब परिवार को उपचार और भोजन की सुविधा मिले तथा युवा को कौशल और रोजगार का मार्ग मिले,तभी विकास का प्रकाश समाज के हर कोने तक पहुंचेगा।
दीपावली हमें यह भी सिखाती है कि एक दीप से दूसरा दीप जलाने पर प्रकाश कम नहीं होता, बल्कि बढ़ता है। इसी भावना को शासन और समाज के संबंधों में भी अपनाने की आवश्यकता है। सरकारें योजनाएं बनाएं, प्रशासन उन्हें ईमानदारी से लागू करे, जनप्रतिनिधि जनता की आवाज बनें और नागरिक भी सामाजिक जिम्मेदारी निभाएं—तभी सामूहिक विकास का सपना साकार होगा।मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय विकास की दिशा, ओम बिरला की संसदीय जिम्मेदारी और कोटा-बूंदी में प्रोत्साहित सामाजिक सहभागिता तथा भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान की जनकल्याणकारी योजनाएं,इन सभी का मूल्यांकन उनके वास्तविक परिणामों और जनहित में योगदान के आधार पर होना चाहिए।इस दीपावली पर हमारी कामना है कि देश में समृद्धि के साथ संवेदना, विकास के साथ समान अवसर और शासन के साथ जवाबदेही भी मजबूत हो। हर घर में दीप जले, हर चेहरे पर मुस्कान आए और समाज का कोई भी वर्ग विकास की रोशनी से वंचित न रहे।
क्योंकि सच्ची दीपावली वही है, जिसमें केवल घर नहीं, बल्कि हर जरूरतमंद का जीवन भी रोशन हो।






