क्षमा से रिश्तों में आती है मधुरता
कोटा। श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन त्रिकाल चौबीसी पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, दादाबाड़ी के अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ ने कहा कि क्षमावाणी पर्व आत्मशुद्धि और आत्ममंथन का पावन अवसर है। जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए क्षमा मांगना और दूसरों को हृदय से क्षमा करना ही इस पर्व की सच्ची सार्थकता है।
उन्होंने कहा कि क्षमा से मन निर्मल होता है, अहंकार मिटता है और रिश्तों में मधुरता आती है। उत्तम क्षमा को केवल पर्व तक सीमित न रखकर इसे जीवन का संस्कार बनाना चाहिए। उन्होंने समाज के सभी लोगों से आह्वान किया कि मन से वैर-विरोध और द्वेष मिटाकर एक-दूसरे से क्षमा मांगें, क्षमा करें तथा प्रेम, करुणा और सद्भाव के साथ जीवन जीने का संकल्प लें। यही क्षमावाणी पर्व का सच्चा संदेश और आत्मकल्याण का मार्ग है।






