कोटा में आयुर्वेदिक उपचार के नाम पर ठगी का आरोप, पीड़ित ने एसपी को सौंपा परिवाद
कोटा। शहर के शीला चौधरी रोड स्थित एक आयुर्वेदिक हॉस्पिटल पर उपचार के नाम पर ठगी किए जाने का आरोप सामने आया है। दादाबाड़ी निवासी बृजेश कुमार जैन ने मामले को लेकर कोटा पुलिस अधीक्षक को परिवाद सौंपकर पूरे प्रकरण की जांच एवं कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित के अनुसार, वह पिछले करीब चार-पांच वर्षों से चलने-फिरने में असमर्थ हैं। उनके एक पैर में पोलियो की समस्या भी है। इसी दौरान एक परिचित ने उन्हें शीला चौधरी रोड स्थित आयुर्वेदिक हॉस्पिटल में उपचार कराने की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने 17 अगस्त को अस्पताल से संपर्क किया। पीड़ित का आरोप है कि अस्पताल की ओर से उन्हें बताया गया कि उपचार के बाद वह दो दिन में पूरी तरह ठीक हो जाएंगे।
बृजेश कुमार जैन के अनुसार, उपचार के नाम पर उनसे अलग-अलग मदों में करीब 30 हजार रुपये लिए गए। अस्पताल में उन्हें कुछ आयुर्वेदिक दवाइयां भी दी गईं, जिनके लिए भी उनसे राशि ली गई। पीड़ित का कहना है कि अस्पताल में उनका उपचार मुख्य रूप से छोटी-मोटी एक्सरसाइज और मालिश तक सीमित रहा।
पीड़ित ने बताया कि अस्पताल में उपचार के दौरान किए गए भुगतान और उपचार से संबंधित रसीदें उनके पास मौजूद हैं। उनका आरोप है कि पूर्व में अस्पताल की ओर से दी गई आयुर्वेदिक दवाइयों की रसीदों को लेकर जब उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से जानकारी और संतोषजनक जवाब मांगा, तो उन्हें कोई स्पष्ट एवं संतुष्ट करने वाला जवाब नहीं दिया गया।
पीड़ित के मुताबिक, उपचार के बावजूद उन्हें कोई खास लाभ नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने डॉक्टर से मिलने का प्रयास किया, लेकिन अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों ने विभिन्न कारण बताते हुए उन्हें डॉक्टर से मिलने नहीं दिया। आरोप है कि इसके बाद अस्पताल की ओर से अन्य प्रकार के उपचार की जानकारी देते हुए और राशि जमा कराने के लिए कहा गया।
बृजेश कुमार जैन के अनुसार, जब उन्होंने अस्पताल के स्टाफ से उपचार को लेकर शिकायत की तो उन्हें तीन दिन और उपचार कराने की बात कही गई तथा इसके लिए अलग से शुल्क देने को कहा गया। इसके बाद उन्हें उपचार के नाम पर ठगी किए जाने का संदेह हुआ।
मामले को लेकर पीड़ित ने अब कोटा पुलिस अधीक्षक को परिवाद सौंपकर पूरे प्रकरण की जांच कराने और उचित कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित का कहना है कि उनके पास उपचार के दौरान किए गए भुगतान की रसीदें सहित संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें जांच के दौरान पुलिस के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है।
फिलहाल मामले में पुलिस जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।





