आरक्षित वर्ग को आरक्षित सीटों तक सीमित करना सामाजिक न्याय के खिलाफ : राजेन्द्र सैन
महावीर सेन बूंदी -जयस्थल ✍️
जयपुर नगर निगम की 94 सामान्य सीटों में सभी वर्गों को मिले समान राजनीतिक अवसर, EWS को भी प्रतिनिधित्व नहीं आर्थिक सामाजिक न्याय के विरुद्ध है
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में 30 वार्ड ओबीसी, 20 एससी, 6 एसटी और 94 वार्ड सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित किए गए हैं। आरक्षण व्यवस्था को लेकर ओबीसी एवं अन्य वंचित वर्गों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाते हुए राजेन्द्र सैन, सदस्य ओबीसी एडवाइजरी काउंसिल एवं पूर्व नेशनल कॉर्डिनेटर, ऑल इंडिया कांग्रेस ओबीसी विभाग ने राजनीतिक दलों से टिकट वितरण में व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं करने करने पर विरोध जताते हुए
राजेन्द्र सैन ने कहा कि आरक्षण का अर्थ अवसरों को सीमित करना नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व के अवसरों को बढ़ाना है। किसी आरक्षित वर्ग के योग्य व्यक्ति को केवल आरक्षित सीट तक सीमित करना लोकतांत्रिक भावना के अनुरूप नहीं है। योग्य एवं जिताऊ ओबीसी, एससी, एसटी तथा अन्य वंचित वर्गों के उम्मीदवारों को सामान्य सीटों पर भी चुनाव लड़ने और राजनीतिक दलों से टिकट पाने का समान अवसर मिलना चाहिए।
सैन ने आरोप लगाया कि जयपुर नगर निगम की 94 सामान्य सीटों में राजनीतिक दलों द्वारा एक जाति विशेष को लगभग 35-40 सीटें दिए जाने की चर्चा है, जबकि अन्य सामाजिक समूहों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि यदि सामान्य सीटों पर भी टिकट वितरण कुछ सीमित जातियों तक केंद्रित रहेगा तो राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन प्रभावित होगा।
उन्होंने EWS वर्ग को भी सामान्य सीटों में प्रतिनिधित्व नहीं देने विरोध करते हुए कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के नाम पर केवल प्रभावशाली एवं धनाढ्य लोगों को प्राथमिकता देना उचित नहीं है। टिकट वितरण में वास्तविक सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक भागीदारी को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
राजेन्द्र सैन ने कहा कि राजनीतिक दलों को टिकट वितरण के समय जातिगत संतुलन, जनसंख्या, सामाजिक भागीदारी, जनाधार, संगठन में सक्रियता, स्थानीय स्वीकार्यता और जीतने की क्षमता को प्रमुख आधार बनाना चाहिए। ओबीसी की उन वंचित जातियों को भी सामान्य सीटों पर पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए जिन्हें लंबे समय से राजनीतिक प्रतिनिधित्व बहुत कम मिला है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय केवल आरक्षित वार्डों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सामान्य सीटों पर भी सभी वर्गों के योग्य और जिताऊ उम्मीदवारों को समान राजनीतिक अवसर मिलेंगे तभी वास्तविक सामाजिक समावेश और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व मजबूत होगा।






