Friday, August 28, 2026
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, तलवंडी केंद्र पर रक्षा बंधन का दिव्य उत्सव – पवित्रता और आत्मीयता का संगम

भारत सिंह चौहान✍️

कोटा।रक्षा बंधन केवल भाई-बहन का त्योहार नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन का, पवित्रता और सुरक्षा के वचन का उत्सव है। इसी दिव्य भावना के साथ प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वावधान में तलवंडी स्थित सेवा केंद्र पर रक्षा बंधन का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, प्रेम और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ परमपिता परमात्मा शिव और प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की स्मृति में दीप प्रज्वलन एवं मधुर गीतों के साथ हुआ। केंद्र को अत्यंत सुंदरता से सजाया गया था। “रक्षाबंधन की शुभकामनाएं” का बैनर और पवित्रता का प्रतीक ब्रह्मा बाबा का दिव्य चित्र पूरे वातावरण को अलौकिक बना रहा था।

इस अवसर पर केंद्र की संचालिका आदरणीय ब्रह्माकुमारी देविशा दीदी जी ने रक्षा बंधन के आध्यात्मिक रहस्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, “यह राखी केवल कलाई पर बांधा जाने वाला धागा नहीं है, यह आत्मा की पवित्रता का प्रतीक है। सच्ची राखी तब बंधती है जब हम मन, वचन और कर्म से पवित्र रहने का व्रत लेते हैं और अपनी दृष्टि, वृत्ति को शुद्ध रखते हैं। परमात्मा हमें यही सच्ची रक्षा का सूत्र बांधते हैं।”

भावुक कर देने वाले क्षण में देविशा दीदी एवं रीना दीदी ने डॉ. आर बी गुप्ता सहित उपस्थित सभी भाइयों को बड़े ही स्नेह और पवित्र भाव से रक्षा सूत्र बांधे। यह दृश्य केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि एक आत्मिक मिलन था। दीदी ने सभी भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर, उनके उज्ज्वल भविष्य, स्वस्थ जीवन और आत्मिक उन्नति की कामना की।

इस अवसर पर डॉ. आर बी गुप्ता ने कहा कि ब्रह्माकुमारी केंद्र पर आकर उन्हें हमेशा शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा, “ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा बांधी गई यह राखी मुझे सांसारिक बंधन से ऊपर उठकर समाज की हर बहन-बेटी की रक्षा, उनके स्वास्थ्य और सम्मान की रक्षा करने का संकल्प दिलाती है। यह मेरे लिए अत्यंत सौभाग्य की बात है। यह राखी मेरे लिए सिर्फ धागा नहीं, एक पवित्र जिम्मेदारी है।”

उन्होंने आगे कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान निस्वार्थ भाव से समाज में आध्यात्मिक जागरूकता, नारी सम्मान और संस्कारों का जो अलख जगा रहा है, वह आज के समय में अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम के अंत में सभी को प्रसाद वितरित किया गया और सभी ने एक-दूसरे को प्रेम और शांति के साथ रक्षा बंधन की शुभकामनाएं दीं। पूरा वातावरण “पवित्रता ही सच्ची सुरक्षा है” के दिव्य संदेश से गूंज उठा। उपस्थित सभी भाइयों ने जीवन में पवित्रता, शांति और भाईचारे को बनाए रखने का संकल्प लिया।

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