कोटा नगर निगम चुनाव: 100 वार्ड, 34 महिला आरक्षित; टिकट वितरण पर सस्पेंस बरकरार, दावेदारों की धड़कनें तेज
विशेष संवाददाता: भारत सिंह चौहान
कोटा/नगर निगम कोटा के नवगठित 100 वार्डों में पार्षद पद के चुनाव को लेकर चुनावी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। टिकट वितरण के अंतिम चरण में दावेदारों के बीच उत्साह के साथ-साथ गहरी बेचैनी और असमंजस का माहौल बना हुआ है। दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के शीर्ष स्तर पर जातीय, सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने के लिए लगातार मंथन का दौर जारी है। सूत्रों के अनुसार, कई प्रमुख चेहरों के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं, लेकिन बगावत के डर और अंतिम रणनीतिक फेरबदल के चलते औपचारिक घोषणा को 31 अगस्त यानी नामांकन के अंतिम दिन तक टाला जा रहा है।
दावेदारों के सामने इस समय कई मोर्चों पर चुनौतियां खड़ी हैं। पहली प्राथमिकता अपनी मनपसंद सीट से पार्टी का टिकट हासिल करना है। इसके तुरंत बाद नामांकन पत्र में किसी भी तकनीकी चूक से बचना सबसे बड़ी चिंता है, ताकि जांच के दौरान पर्चा रद्द न हो जाए। दलों की असली अग्निपरीक्षा नामांकन के बाद शुरू होगी, जब टिकट से वंचित नाराज और बागी उम्मीदवारों को साधना होगा। 3 सितंबर दोपहर 3 बजे नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद ही चुनावी मैदान की वास्तविक और स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।
इस बार के चुनाव में महिला शक्ति का दबदबा साफ नजर आ रहा है। कुल 100 वार्डों में से 34 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं, जिनमें सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए 19, ओबीसी के लिए 7, अनुसूचित जाति के लिए 6 और अनुसूचित जनजाति के लिए 2 वार्ड शामिल हैं। इसके अतिरिक्त इस बार मेयर की कुर्सी भी ओबीसी महिला के लिए आरक्षित है। शहर के कुल 8.24 लाख मतदाताओं में से 4.50 लाख महिला और 4.18 लाख पुरुष मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 11 सितंबर को सभी 100 वार्डों में मतदान होगा और 14 सितंबर को चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे, जिसके बाद 21 सितंबर को महापौर और 22 सितंबर को उपमहापौर का चुनाव संपन्न होगा।





