जाए सासरे जा बेटी,लूण तेल न’गा बेटी।
सब न’ दीजे ताती रोटी,अर तू गाल़्या खा बेटी।।
कोटा/ हिंदी और राजस्थानी (हाडौती) भाषा के सुप्रसिद्ध कवि दुर्गादान सिंह गौड़ का 16 अगस्त को इलाज के दौरान आकस्मिक निधन हो जाने पर झालावाड़ जिले के उनके पैतृक गांव जालपा में अंतिम संस्कार देकर अंतिम विदाई दी गई ।
सारंग साहित्य समिति कोटा द्वारा शोक सभा आयोजित की गई, जिसमें राष्ट्रीय कवि शशिकांत यादव, जगदीश सोलंकी ,मुकटमणि राज ,कुंवर जावेद ,साहित्यकार अंबिका दत्त चतुर्वेदी, संरक्षक रामकरण प्रभाती ,अध्यक्ष एडवोकेट दिनेश सिंह जुझार ,राजेंद्र पवार , बाबू बंजारा ,आनंद हजारी ,किशन वर्मा, अखिलेश अखिल बंटी, बद्री लाल दिव्या ,महावीर मेहरा ,सहित कई साहित्यकार और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे । साहित्यकार अंबिका दत्त चतुर्वेदी व मुकुटमणि राज ने कहा की दुर्गा सिंह गौड़ हाडोती व राजस्थान नहीं भारत के सिरमोर कवि थे।
कवि सम्मेलनों में उनको सुनने के लिए श्रोता देर रात तक बैठे रहते थे । आज वे हमारे बीच नहीं रहे,पर उनके गीतों की मीठास, गीतों में लिखा दर्द, पीड़ा हमेशा याद रहेगी । साहित्य के लिए यह बहुत बड़ी क्षति है । आज हमारा मार्ग पृथक चला गया ।





