“भले ही मैं दूर हूँ, लेकिन अपने भावों को निकट तक भेजता रहता हूँ” — आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज
कोटा। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर के पूर्व शिक्षा नगरी कोटा के आध्यात्मिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी में आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान विश्व शांति हवन (यज्ञ) जिनवाणी शोभा यात्रा के दौरान परम पूज्य राष्ट्रसंत, युगश्रेष्ठ संतशिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज के सुयोग्य शिष्य, ज्येष्ठ-श्रेष्ठ निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज ससंघ के पावन वर्षायोग (चातुर्मास) की घोषणा होते ही पूरा मंदिर परिसर युग श्रेष्ठ संतशिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज “मुनिश्री योगसागर जी महाराज की जय” और “जय जिनेन्द्र” के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की आंखों में भक्ति, हृदय में उल्लास और वातावरण में धर्म की दिव्यता स्पष्ट दिखाई दी।
समिति के अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ, निदेशक हुकम जैन ‘काका’ ने संयुक्त रूप से बताया कि यह केवल कोटा ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण राजस्थान के लिए अत्यंत गौरव एवं सौभाग्य का विषय है। पूज्य मुनिश्री का अधिकांश वर्षायोग मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक जैसे राज्यों में हुआ है, जबकि पहली बार राजस्थान की पुण्यभूमि पर उनका चातुर्मास होने जा रहा है । यह सम्पूर्ण प्रदेश के आध्यात्मिक उत्थान और पुण्योदय का शुभ संकेत है।
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9 अगस्त को होगा भव्य कलश स्थापना महोत्सव, धर्मप्रभावना का बनेगा ऐतिहासिक अवसर
समिति ने बताया कि रविवार, 9 अगस्त को प्रातः 8:00 बजे श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी, कोटा में पूज्य मुनिश्री के वर्षायोग के शुभारंभ के उपलक्ष्य में भव्य कलश स्थापना महोत्सव आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण एवं गुरुवंदना से होगा। इसके पश्चात पूजन, भव्य कलश स्थापना, मंगल आरती एवं विविध धार्मिक अनुष्ठान वैदिक एवं जैन परंपरा के अनुरूप सम्पन्न होंगे। हजारों श्रद्धालुओं एवं धर्मप्रेमियों की उपस्थिति में यह आयोजन जिनशासन की प्रभावना और गुरुभक्ति का अनुपम उदाहरण बनेगा।
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गुरु पूर्णिमा के पावन दिवस पर श्रद्धालुओं ने युगश्रेष्ठ संतशिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज के प्रेरणादायी वचनों का भावपूर्ण स्मरण किया जाएगा —
“हमारे ज्ञानसागर महाराज कहते थे— भले ही मैं दूर हूँ, लेकिन अपने भावों को तो निकट तक भेजता रहता हूँ।”
इन वचनों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गुरु-भक्ति, आत्मसंयम और साधना के प्रति और अधिक प्रेरित किया।
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चातुर्मास जीवों की रक्षा, करुणा और आत्मकल्याण की साधना का पर्व है : मुनिश्री
अपने मंगल प्रवचन में पूज्य मुनि श्री योगसागर जी महाराज ने वर्षायोग की आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्ता का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि वर्षाकाल में सूक्ष्म जीवों की उत्पत्ति अत्यधिक होती है। अहिंसा की सर्वोच्च साधना के लिए दिगम्बर मुनि चार माह तक एक ही स्थान पर रहकर तप, ध्यान एवं आत्मचिंतन करते हैं।
उन्होंने कहा—
“साधु किसी नगर या व्यक्ति से नहीं, बल्कि भगवान की आज्ञा से बंधते हैं। चातुर्मास केवल एक स्थान पर ठहरने का नाम नहीं, बल्कि करुणा, दया, आत्मशुद्धि और कर्मनिर्जरा की महान साधना है।”
मुनिश्री ने कहा कि अहिंसा केवल दूसरों पर दया करना नहीं, बल्कि अपने भीतर के राग, द्वेष और मोह का क्षय करना भी है। जब मनुष्य स्वयं पर दया करना सीख जाता है, तभी वह वास्तविक मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर होता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि चार माह के इस आध्यात्मिक अवसर को जीवन परिवर्तन का माध्यम बनाएं तथा प्रतिमा-व्रत, स्वाध्याय, संयम और धर्मानुशासन का पालन कर अपने जीवन को सार्थक बनाएं।
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जहाँ संतों का वर्षायोग होता है, वह भूमि तीर्थ बन जाती है
समिति पदाधिकारियों ने कहा कि वीतराग संतों का वर्षायोग जिस स्थान पर होता है, वह भूमि तीर्थ के समान पवित्र हो जाती है। गुरुवर का सान्निध्य केवल प्रवचन सुनने का अवसर नहीं देता, बल्कि समाज में संयम, सदाचार, आत्मचिंतन, आध्यात्मिक जागरण और धार्मिक संस्कारों का वातावरण निर्मित करता है।
उन्होंने आगम वचन—
“विणओ मोक्खद्वारं” (विनय ही मोक्ष का द्वार है)
—का स्मरण कराते हुए कहा कि गुरु के प्रति श्रद्धा, विनय और सेवा आत्मकल्याण का प्रथम सोपान है। गुरुवर के श्रीचरणों में समर्पित प्रत्येक भाव, प्रत्येक सेवा और प्रत्येक कलश अनन्त भवों के कल्याण का कारण बनता है।
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भक्ति और श्रद्धा से सम्पन्न हुआ सिद्धचक्र महामंडल विधान विश्व शांति हवन (यज्ञ) जिनवाणी शोभा यात्रा
मुख्य संयोजक धर्मचंद जैन धानोप्या एवं अर्चना (रानी) सर्राफ ने बताया कि श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान विश्व शांति हवन (यज्ञ) जिनवाणी शोभा यात्रा अंतिम दिवस व पूर्णाहुति यज्ञ व अर्घ्य अत्यंत श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ समर्पित किए गए। विधानाचार्य अभिषेक एवं शुभम भैया जी के निर्देशन में विधिपूर्वक आराधना की। पूरा मंदिर परिसर णमोकार महामंत्र, मंगलाचरण, जैन भक्ति गीतों और जयघोषों से गुंजायमान रहा। बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने सहभागी होकर आत्मकल्याण एवं समस्त प्राणिमात्र के मंगल की कामना की।
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आज के प्रमुख पुण्यार्जक
समिति अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ ने बताया कि आज की शांतिधारा का पुण्यार्जन राजेन्द्र, हुकम जैन ‘काका’ हरसोरा परिवार, महावीर मित्तल तथा श्रीमती सुशीला एवं विवेक ठोरा परिवार द्वारा प्राप्त किया गया।
महामंत्री महेन्द्र कासलीवाल ने बताया कि श्रावक श्रेष्ठी, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट का पुण्यार्जन राजेन्द्र ,सरोज बागड़िया परिवार सरोला व विनोद कामनी गर्ग परिवार द्वारा किया गया।
उपाध्यक्ष सुमित जैन एवं मनोज बगड़ा ने बताया कि भक्तामर विधान का पुण्यार्जन महावीर मित्तल परिवार व प्रमोद बागड़िया परिवार द्वारा प्राप्त किया गया।
प्रशासनिक मंत्री पारस दोराया ने बताया कि आज चतुर्दशी के कारण उपवास होने से आहार क्रिया नहीं हो सकी।
समस्त समाज से धर्मलाभ का आह्वान
पुण्योदय आयोजन समिति व श्री सकल दिगम्बर जैन समाज समिति, कोटा ने सकल दिगम्बर जैन समाज से सपरिवार अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर 9 अगस्त को आयोजित भव्य वर्षायोग कलश स्थापना महोत्सव में सहभागी बनने का आग्रह किया है। समिति का कहना है कि यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गुरुभक्ति, जिनशासन की प्रभावना, समाज की एकता और अनन्त पुण्य अर्जन का दुर्लभ एवं ऐतिहासिक अवसर है।
भव्य कलश स्थापना महामहोत्सव
📅 दिनांक: रविवार, 9 अगस्त
🕗 समय: प्रातः 8:00 बजे
📍 स्थान: श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी, कोटा (राजस्थान)
आयोजक:
श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन त्रिकाल चौबीसी,
पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी, कोटा
निवेदक:
श्री सकल दिगम्बर जैन समाज समिति, कोटा





