एडवोकेट अन्सार इन्दौरी और कन्हैया सोनी ने की दमदार पैरवी
कोटा। वाणिज्यिक न्यायालयवाणिज्यिक न्यायालय, कोटा ने पश्चिम मध्य रेल, कोटा द्वारा दायर ₹8,31,713 की वसूली संबंधी वाद संख्या 88/2024 को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने माना कि रेल्वे अपने दावे के समर्थन में ठोस, स्पष्ट और पूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा, इसलिए राशि की वसूली का अधिकार सिद्ध नहीं हो सका।
ठेकेदार के वकीलों ने बताया कि यह वाद वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, पश्चिम मध्य रेल, कोटा की ओर से दायर किया गया था, जिसमें ठेकेदार मेसर्स आर.के. कॉन्ट्रैक्टर एंड सप्लायर्स पर वाणिज्यिक देयताओं के आधार पर ₹8,31,713 बकाया होने का दावा किया गया था। रेल्वे का कहना था कि डकनिया तालाब रेलवे स्टेशन पर साइकिल, मोटरसाइकिल और कार पार्किंग स्टैंड का ठेका 01.03.2016 से 28.02.2019 तक की अवधि के लिए दिया गया था, तथा बाद में 01.03.2019 से 27.05.2019 तक इसे बढ़ाया गया।
उन्होंने बताया कि ठेकेदार ने अपने जवाब में दलील दी कि मूल ठेका अवधि पूरी होने के बाद उसने अनाधिकृत रूप से ₹4 लाख की अतिरिक्त वसूली की थी, जबकि जीएसटी, ब्याज, पेनल्टी और अन्य मदों के संबंध में रेलवे का दावा अस्पष्ट और अपूर्ण है। ठेकेदार ने यह भी कहा कि जीएसटी अधिनियम लागू होने की स्थिति और ठेके की शर्तों के कारण उस पर उक्त राशि का दायित्व नहीं बनता।
वकीलों बताया कि न्यायालय ने साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए पाया कि रेल्वे यह स्पष्ट नहीं कर सका कि किस मद में कितनी राशि बकाया है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि लाइसेंस फीस, जीएसटी, लेट फीस, पेनल्टी और अन्य शुल्कों का पृथक-पृथक विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे दावा विश्वसनीय रूप से सिद्ध नहीं हो सका।
वकीलों ने बताया कि निर्णय में यह भी उल्लेख किया गया कि रेल्वे के गवाह ने जिरह में स्वीकार किया कि वह जीएसटी की सही बकाया राशि, लेट फीस और पेनल्टी की पृथक गणना स्पष्ट रूप से नहीं बता सका। न्यायालय ने इसे रेल्वे के पक्ष को कमजोर करने वाला तथ्य माना और निष्कर्ष निकाला कि रेल्वे का दावा अस्पष्ट, अपूर्ण और असिद्ध है। इन परिस्थितियों में न्यायालय ने वाद को खारिज करते हुए कहा कि रेल्वे ठेकेदार से ₹8,31,713 की वसूली सिद्ध नहीं कर पाया।
वकीलों ने बताया कि न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल कुल राशि का उल्लेख पर्याप्त नहीं है; प्रत्येक मद का अलग-अलग, सुस्पष्ट और साक्ष्य-समर्थित विवरण आवश्यक है। यही कारण रहा कि ₹8,31,713 की वसूली का दावा टिक नहीं सका।
वकीलों ने कहा कि वाणिज्यिक विवादों में यह निर्णय इस बात को रेखांकित करता है कि दस्तावेजी साक्ष्य, मदवार हिसाब और सुस्पष्ट अभिवचन किसी भी वसूली वाद की सफलता के लिए अनिवार्य हैं।
प्रमुख बिंदु
– वाद संख्या 88/2024, वाणिज्यिक न्यायालय कोटा से संबंधित था।
– वादी: वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, पश्चिम मध्य रेल, कोटा।
– प्रतिवादी: मेसर्स आर.के. कॉन्ट्रैक्टर एंड सप्लायर्स, कोटा।
– विवाद: रेलवे स्टेशन पार्किंग ठेके से संबंधित बकाया राशि।
– न्यायालय का निष्कर्ष: दावा स्पष्ट एवं पूर्ण साक्ष्य से सिद्ध नहीं हुआ।
– परिणाम: ₹8,31,713 की वसूली का वाद खारिज।






