भारत सिंह चौहान
कोटा मंडल में शुरू हुई अनूठी पहल, शाम 5 से 6 बजे सीधे मंडल रेल प्रबंधक से मिल सकेंगे कर्मचारी और आमजन, पंजीकरण अनिवार्य
कोटा। अगर आप कोटा मंडल के रेलकर्मी हैं और आपकी कोई समस्या महीनों से लंबित है — या आप एक आम नागरिक हैं जिसकी शिकायत दफ्तर के चक्करों में कहीं खो गई है — तो अब आपके लिए एक सीधा रास्ता खुल गया है। मंडल रेल प्रबंधक अनिल कालरा के निर्देशन में कोटा मंडल में एक महत्वपूर्ण व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत प्रत्येक गुरुवार सायं 5 बजे से 6 बजे तक कोई भी कर्मचारी अथवा आम शिकायतकर्ता मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय में स्वयं मंडल रेल प्रबंधक से मिलकर अपनी समस्या रख सकता है।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी समस्या फाइलों में दबी न रहे और शिकायतकर्ता को सर्वोच्च मंडल अधिकारी तक सीधी पहुंच मिले। उन्होंने बताया कि सुनवाई में शामिल होने के इच्छुक कर्मचारी एवं नागरिक पूर्व निर्धारित पंजीकरण के आधार पर मंडल रेल प्रबंधक से भेंट कर सकेंगे। इसके लिए आवश्यक है कि शिकायतकर्ता पहले संबंधित शाखा अधिकारी अथवा अपर मंडल रेल प्रबंधक स्तर पर अपनी समस्या प्रस्तुत कर चुके हों, तत्पश्चात निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय में समय प्राप्त किया जा सकेगा।
सौरभ जैन ने यह भी बताया कि यदि किसी सप्ताह अपरिहार्य कारणों से गुरुवार को यह बैठक संभव न हो सके, तो उसी सप्ताह शुक्रवार को निर्धारित समय पर शिकायतकर्ताओं को अवसर प्रदान किया जाएगा — अर्थात किसी भी स्थिति में शिकायतकर्ता को उस सप्ताह वंचित नहीं रखा जाएगा। मंडल प्रशासन द्वारा यह भी सुनिश्चित किया गया है कि प्रस्तुत शिकायतों पर संबंधित विभागों द्वारा समयबद्ध कार्रवाई की जाए एवं वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग की जाए, ताकि शिकायतकर्ता को उसकी समस्या की प्रगति की जानकारी मिलती रहे।
उल्लेखनीय है कि इसी व्यवस्था के अंतर्गत मंडल रेल प्रबंधक प्रत्येक गुरुवार सायं 4 बजे से 5 बजे तक कोटा मंडल के ठेकेदारों की शिकायतों एवं समस्याओं की भी सुनवाई करेंगे, जिससे रेलवे परियोजनाओं एवं विकास कार्यों के क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं गति सुनिश्चित हो सके। ठेकेदारों को प्रत्येक मंगलवार सायं 4 बजे तक मंडल रेल प्रबंधक के निजी सचिव कार्यालय में आवश्यक दस्तावेजों सहित पंजीकरण कराना होगा।
रेल प्रशासन का मानना है कि यह पहल प्रशासन एवं आमजन के बीच विश्वास की एक नई कड़ी बनेगी — जहाँ समस्या केवल सुनी नहीं जाएगी, बल्कि उसका समाधान भी सुनिश्चित किया जाएगा।






