Wednesday, October 7, 2026
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जब हौसले ने नापी महाद्वीपों की दूरी, अमेरिका के मिनेसोटा राज्य की महिला को कोटा में मिली रोशनी

भारत सिंह चौहान

अमेरिका के मिनेसोटा राज्य के पाइन सिटी से राजस्थान के कोटा तक की दूरी लगभग बारह हजार किलोमीटर है, लेकिन शैरी मात्ज़के के लिए यह यात्रा महज़ भौगोलिक दूरी तय करने की नहीं थी, बल्कि अपने जीवन में फिर से रोशनी लौटाने की थी। वर्षों से मोतियाबिंद ने धीरे-धीरे उनकी दुनिया को धुंधला कर दिया था। अपने नाती-पोतों के चेहरे एवं आँखों की चमक उनके लिए अब एक धुंधली तस्वीर बनकर रह गई थी, रात के तारों भरे आकाश की चमक फीकी पड़ गई थी, और पुस्तकें पढ़ना, चेहरे पहचानना तथा आत्मविश्वास के साथ चलना जैसे रोज़मर्रा के काम भी अनिश्चितता से भर गए थे। सर्वश्रेष्ठ उपचार की तलाश में दृढ़ संकल्पित शैरी ने महाद्वीपों की दूरी पार की और भारत प्रवास के दौरान हृदय में आशा लिए कोटा स्थित सुवि आई हॉस्पिटल एवं लेसिक लेज़र सेंटर पहुँचीं।

डॉ. सुरेश पाण्डेय और डॉ. विदुषी शर्मा की विशेषज्ञ देखरेख में शैरी की सुवि आई हॉस्पिटल में उन्नत मोतियाबिंद सर्जरी की गई, जिसमें ज़ायडस सिफी मिनी वेल टोरिक इंट्राओकुलर लेंस प्रत्यारोपित किया गया। यह प्रक्रिया अत्यंत सटीक, सौम्य और जीवन बदल देने वाली रही। सफल नेत्र ऑपरेशन के बाद का वह क्षण गहरी भावनाओं से भरा हुआ था। जो दुनिया परछाइयों में खो गई थी, वह अद्भुत स्पष्टता के साथ लौट आई। उन्होंने दूर दृष्टि में संपूर्ण दृष्टि (20/20) और निकट दृष्टि (N5) हासिल की। शैरी के लिए यह केवल एक सफल शल्यक्रिया नहीं थी, बल्कि एक पुनर्जन्म के समान था। उन्होंने आँखों में खुशी के आँसू लिए कहा, “मैं अब फिर से अपनी नातिन के बनाए चित्रों को पढ़ सकती हूँ, मैं तारों को साफ़ देख सकती हूँ।” उस क्षण में मीलों की दूरी मिट गई, सीमाएँ निरर्थक हो गईं और जो शेष रहा वह था विश्वास, कौशल और मानवीय आत्मीयता। इस अवसर पर नेत्र विशेषज्ञ डॉ. सुरेश पाण्डेय एवं डॉ. विदुषी शर्मा ने शैरी को अपनी पुस्तक ए हिप्पोक्रेटिक ओडिसी: लेसन्स फ्रॉम अ डॉक्टर कपल ऑन लाइफ, मेडिसिन, चैलेंजेज़ एंड एंटरप्रेन्योरशिप भी भेंट की।

शैरी की यह कहानी एक बड़े सत्य को उजागर करती है कि स्वास्थ्य सेवा में उत्कृष्टता अब केवल बड़े वैश्विक महानगरों तक सीमित नहीं रही। राजस्थान के हृदय में स्थित कोटा शहर में विश्वस्तरीय तकनीक, शल्य चिकित्सा में नवाचार और करुणामय देखभाल हर दिन लोगों के जीवन को बदल रही है। सुवि आई हॉस्पिटल में पास के किसी गाँव का एक किसान और अमेरिका से आया एक अंतरराष्ट्रीय मरीज़ एक ही प्रतीक्षालय में बैठते हैं और दोनों के साथ मरीज़ नहीं, बल्कि परिवार जैसा व्यवहार किया जाता है। यहाँ तकनीक का मिलन कोमलता से होता है, सटीकता का संगम सहानुभूति से होता है, और दृष्टि केवल आँखों को ही नहीं, बल्कि समूचे जीवन को लौटाई जाती है। अमेरिका से कोटा आईं शैरी की यह यात्रा सिद्ध करती है कि जब आशा पर्याप्त दूर तक यात्रा करती है, तो उसे रोशनी अवश्य मिल जाती है, और कभी-कभी वह रोशनी उन्हीं स्थानों पर सबसे अधिक चमकती है, जहाँ दुनिया को उसकी सबसे कम उम्मीद होती है।

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