Monday, March 9, 2026
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सरकन्या में 150 साल पुरानी परंपरा के साथ हुआ ढाईकड़ी लोकनाटक मंचन

बांरा/ होली एवं न्हाण के अवसर पर विगत 150 सालों से यह लोकनाट्य -उत्सव बारां जिले के सरकन्या गांव में आयोजित होता आ रहा है। यहां पर ढाईकड़ी लोकनाट्य शैली में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र,राजा मोरध्वज और भक्त प्रहलाद के नाटक मंचित होते आए हैं। कार्यक्रम संयोजक योगेश यथार्थ ने बताया कि स्थानीय नवयुवक लोककलाकारों द्वारा इस बार ये लोकनाटक पारंपरिक लोकनाट्य शैली ढाईकड़ी में आधुनिक मंचीय साज-सज्जा के साथ मंचित किए गए। हाड़ौती क्षेत्र की ढाईकड़ी लोकनाट्य शैली विश्व भर में प्रसिद्ध है। यह लोकनाट्य शैली दुनिया भर की उन तीन नाट्य विधाओं में से एक है जिनके संवादों को संगीतमय काव्यात्मक छंद में कलाकारों द्वारा गाकर प्रस्तुत किया जाता है। ढाईकड़ी शैली में रामलीला पाटोंदा, मांगरोल और पीपल्दा कलां में आयोजित होती है लेकिन इस शैली में लोकनाटक केवल सरकन्या में हीं आयोजित होते हैं। इस कार्यक्रम के समारोह की अध्यक्षता राष्ट्रीय कवि,ख्यातनाम साहित्यकार विश्वामित्र दाधीच ने की मुख्य-अतिथि  ओम सोनी मधुर एवं विशिष्ट अतिथि  ओम मेरोठा,  विष्णु विश्वास ,  चेतन मालव,  बद्रीलाल दिव्य रहे। समापन समारोह में  जगदीश निराला, प्रवीण शर्मा, सुरेन्द्र सिंह,  मनोज नंदवाना, जगन्नाथ मेहरा,  पोकरी लाल मेहरा, हरिओम शर्मा जैसे अनेक गणमान्य व्यक्ति व ख्यातनाम साहित्यकार मौजूद रहे। श्री विश्वामित्र दाधीच ने इस अवसर पर बोलते हुए हाड़ौती की प्रसिद्ध ढाईकड़ी लोकनाटक विधा के बारे में समझाया।  ओम सोनी मधुर इस कार्य को असाधारण बताते हुए कहा कि इन लोकनाटकों के मंचन और संरक्षण हमारी सांस्कृतिक धरोहर बची रहेगी। सरकन्या के लोग साधुवाद के पात्र हैं जिन्होंने अपनी पारंपरिक सांस्कृतिक धरोहर को मजबूती से संभाल रखा है।

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