भारत सिंह चौहान
कोटा/राजीव गांधी नगर ऑक्सीजोन विकास समिति के अध्यक्ष प्रतीक गोयल ने कोटा की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी कोटा के कोचिंग परिणाम अत्यंत उत्साहजनक रहे हैं। कोचिंग छात्रों की संख्या में निरंतर हो रही वृद्धि शहर के लिए एक सुखद संकेत है। हालांकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि हॉस्टल्स की बढ़ती संख्या के अनुपात में छात्रों की यह संख्या अभी पूर्णतः पर्याप्त नहीं है, फिर भी शहर की अर्थव्यवस्था के लिए यह एक सकारात्मक शुरुआत है।
सफलता का दायरा केवल IIT या चिकित्सा तक सीमित नहीं
छात्रों का मनोबल बढ़ाते हुए प्रतीक गोयल ने कहा, “यह आवश्यक नहीं है कि सफलता के आयाम केवल IIT, चिकित्सा या सिविल सेवा के माध्यम से ही स्थापित किए जा सकें। यदि मन में जुनून हो, तो किसी भी क्षेत्र में श्रेष्ठता हासिल की जा सकती है; इसमें उम्र कभी बाधा नहीं बनती।”
उन्होंने उन छात्रों को विशेष संदेश दिया जिनका चयन JEE या NEET में नहीं हो पाया है। प्रसिद्ध मैनेजमेंट गुरु एन. रघुरामन के शब्दों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “देश के किसी प्रतिष्ठित संस्थान में एक सीट सुरक्षित करने की दौड़ में एक अंक का अंश भी आपको बाहर कर सकता है। इसका अर्थ यह कदापि नहीं है कि छात्र अक्षम है, बल्कि सत्य यह है कि उन प्रीमियम संस्थानों में सीटें अत्यंत सीमित हैं।” गोयल ने आह्वान किया कि छात्र निराश न हों, क्योंकि असफलता केवल एक पड़ाव है। युवा अब स्टार्टअप, स्किल डेवलपमेंट और नए उभरते तकनीकी क्षेत्रों में भी अपना उज्ज्वल भविष्य बना सकते हैं।
कोचिंग के साथ पर्यटन और उद्योगों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता
प्रतीक गोयल ने शहरवासियों और निवेशकों से आग्रह किया कि वे केवल कोचिंग जैसे ‘सॉफ्ट बिजनेस’ को ही एकमात्र विकल्प न मानें। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोटा में पुनः उद्योगों की ओर लौटने की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा, “पिछले कुछ दशकों में कोचिंग की वजह से कोटा के व्यापार को नई गति मिली है, लेकिन अब समय आ गया है कि हम उद्योगों, नवाचार (Innovation), पर्यटन और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों पर भी अपना ध्यान केंद्रित करें। इससे कोटा की अर्थव्यवस्था न केवल मजबूत होगी, बल्कि इसमें विविधता भी आएगी।”
















