अनिल माहेश्वरी की रिपोर्ट
मांगरोल कस्बे के प्रतिष्ठित सेवानिवृत्त शिक्षक बृजराज माहेश्वरी का शुक्रवार शाम आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही 40 वर्ष पूर्व लिया गया नेत्रदान का संकल्प भी साकार हो गया, जिसे उनके शिष्यों और परिजनों ने मिलकर पूरा किया। मांगरोल क्षेत्र में यह पहला नेत्रदान माना जा रहा है।
बृजराज माहेश्वरी ने वर्ष 1986 में ही नेत्रदान का संकल्प पत्र भर दिया था। खास बात यह रही कि निधन से मात्र सात दिन पहले उन्होंने अपने शिष्य पीयूष विजय को इस जिम्मेदारी के लिए सचेत भी कर दिया था, जिससे उनके संकल्प को समय पर पूरा किया जा सका।
निधन की सूचना मिलते ही कोटा से शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम रात करीब 10 बजे ‘ज्योति रथ’ लेकर मांगरोल पहुंची। टीम में शामिल डॉ. कुलवंत गौड़ और जय मेहरा ने नेत्र संकलन की पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न किया।
डॉ. गौड़ ने बताया कि नेत्रदान की प्रक्रिया में केवल 15 मिनट का समय लगता है और इससे चेहरे पर किसी प्रकार की विकृति नहीं आती। इस प्रेरणादायक कार्य के लिए संस्था द्वारा शोकाकुल परिवार को प्रशस्ति पत्र भी भेंट किया गया।
बृजराज माहेश्वरी का यह योगदान समाज के लिए एक मिसाल बन गया है, जो आने वाले समय में लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करेगा।






