Saturday, February 21, 2026
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मोदी-पिचाई वार्ताः भारत की डिजिटल ताकत पर दुनिया का भरोसा

क्या भारत की डिजिटल छलांग नए भू-राजनीतिक समीकरण गढ़ रही है?

डिजिटल अवसंरचना और युवा शक्ति के संगम ने भारत को विश्व तकनीकी मानचित्र पर अग्रणी स्थान की ओर बढ़ाया

डॉ. नयन प्रकाश गांधी

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गूगल प्रमुख सुंदर पिचाई की हालिया मुलाकात उस बदलते वैश्टिक दौर का संकेत है जहाँ डिजिटल शक्ति अब केवल आर्थिक साधन नहीं रही बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और प्रभाव का नया आधार बन चुकी है। जिस समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा नियंत्रण और डिजिटल अवसंरचना वैश्विक शक्ति संतुलन तय करने वाले प्रमुख कारक बनते जा रहे हों उस समय भारत की तेज तकनीकी प्रगति स्वाभाविक रूप से दुनिया का ध्यान खींचती है। पिछले दशक में भारत ने डिजिटल परिवर्तन की ऐसी रफ्तार देखी है जो कई विकसित देशों के लिए भी आश्चर्य का विषय है।

सस्ते डेटा, स्मार्टफोन की व्यापक उपलब्धता और सरकारी डिजिटल पहलों ने इंटरनेट की महानगरों की सीमा से निकालकर कस्बों और गाँवों तक पहुँचा दिया है। परिणामस्वरूप भारत आज दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन उपयोगकर्ता समूहों में शामिल है। यही वजह है कि वैश्विक तकनीकी कंपनियों अब भारत को कैवल संभावित बाज़ार नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदार के रूप में देखने लगी हैं। इस बदलते परिदृश्य में गूगल की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय है। भारत में इसके उत्पाद और सेवाएँ करोड़ों लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं, चाहे जानकारी खोजनी हो, रास्ता ढूँढना हो, डिजिटल भुगतान करना हो या वीडियो देखना हो। वीडियो प्लेटफॉर्म यूट्यूब के करोड़ों भारतीय उपयोगकर्ता इस बात का प्रमाण हैं कि डिजिटल सामग्री अब केवल मनोरंजन नहीं बल्कि शिक्षा, रोजगार और सूचना का प्रमुख स्रोत भी बन चुकी है। इसी तरह एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम देश के अधिकांश स्मार्टफोन चलाता है जिससे तकनीकी पारिस्थितिकी में कंपनी की गहरी उपस्थिति दिखाई देती है।

भारत गूगल संबंधों का महत्व केवल उपयोगकर्ता संख्या से नहीं आँका जा सकता। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने स्थानीय भाषाओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड सेवाओं और स्टार्टअप सहयोग पर निवेश बढ़ाया है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट पहुँच, छोटे व्यवसायों के डिजिटलीकरण और डिजिटल कौशल प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रमों ने तकनीक को सामाजिक परिवर्तन के साधन के रूप में स्थापित किया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक टेक कंपनियों भारत को भविष्य के नवाचार प्रयोग क्षेत्र के रूप में देख रही हैं। भारत की ताकत उसके तीन मूल स्तंभों में निहित है, डेटा, प्रतिभा और डिजिटल ढाँचा। विशाल आबादी विविध डेटा उपलब्ध कराती है, युवा जनसंख्या तकनीकी कौशल का आधार देती है और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना प्रयोगों के लिए मंच तैयार करती है। डिजिटल पहचान प्रणाली, ऑनलाइन भुगतान नेटवर्क और क्लाउड आधारित सेवाओं ने शासन को अधिक पारदर्शी और तेज बनाया है। यही ढाँचा जब एआई आधारित नवाचारों के लिए आधार बन रहा है जिससे स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और शहरी प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएँ खुल रही हैं। सुंदर पिचाई की नेतृत्व शैली इस संदर्भ में उल्लेखनीय है। वे तकनीकी उद्योग में ऐसे नेता माने जाते हैं जो उपयोगकर्ता केंद्रित सोच, जिम्मेदार एआई और वैश्विक सहयोग पर जोर देते हैं। उनका दृष्टिकोण यह रहा है कि तकनीक का असली मूल्य तभी है जब वह आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाए। यही सोच भारत जैसे विविधता भरे देश के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ डिजिटल समावेशन तभी संभव है जब तकनीक स्थानीय भाषाओं और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकसित हो। प्रधानमंत्री मोदी भी लंबे समय से डिजिटल परिवर्तन को विकास की आधारशिला बताते रहे हैं। उनके नेतृत्व में डिजिटल अवसंरचना के विस्तार ने सरकारी सेवाओं को अधिक सुलभ बनाया और नागरिकों की भागीदारी बढ़ाई।

अब यही ढाँचा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत की नीति दृष्टि स्पष्ट संकेत देती है कि वह तकनीकी प्रगति के साथ नैतिकता और सुरक्षा को भी समान महत्व देना चाहता है। डेटा गोपनीयता, एल्गोरिद्मिक पक्षपात और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर संतुलित नियमन भारत को वैश्विक मानक तय करने की स्थिति में ता सकता है। आर्थिक दृष्टि से भी यह संवाद महलपूर्ण है। जब किसी वैश्विक तकनीकी कंपनी का शीर्ष नेतृत्व किसी देश की सरकार के साथ सक्रिय वार्ता करता है तो यह निवेशकों के लिए भरोसे का संकेत होता है कि वहाँ नवाचार के लिए अनुकूल वातावरण है। इससे स्टार्टअप पारिस्थितिकी को पूंजी, संसाधन और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क मिलते हैं। भारत पहले ही दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टमों में शामिल हो चुका है। यदि इसे वैश्विक तकनीकी साझेदारी का सतत समर्थन मिलता रहा तो आने वाले वर्षों में यह विश्व अर्थव्यवस्था में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। भाषाई विविधता भारत की सबसे बड़ी विशेषता है और एआई विकास की सबसे बड़ी चुनौती भी। यदि तकनीकी कंपनियों भारतीय भाषाओं में सटीक और सुरक्षित एआई मॉडल विकसित करती हैं तो डिजिटल सेवाएँ समाज के उस वर्ग तक भी पहुँचेंगी जो अभी तक तकनीकी क्रांति से दूर है। शिक्षा में वैयक्तिक सीख, किसानों के लिए त्वरित सलाह और छोटे व्यापारियों के लिए डिजिटल बाज़ार, ये सभी संभावनाएँ तभी साकार होंगी जब तकनीक स्थानीय संदर्भ को समझे। मोदी पिचाई संवाद इसी दिशा में सहयोग की संभावनाओं को मजबूत करता है। दरअसल यह मुलाकात एक व्यापक संदेश देती है। तकनीक अब केवल उद्योग नहीं कूटनीति का भी माध्यम है। आज एआई, क्लाउड और डेटा सेंटर निवेश को लेकर विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा है और जो देश इन क्षेत्रों में नेतृत्व करेगा वहीं भविष्य की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगा। भारत इस दौड़ में अपेक्षाकृत देर से शामिल हुआ पर उसकी गति और पैमाना उसे विशिष्ट बनाते हैं। अंततः यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या भारत की डिजिटल छलांग वैश्विक शक्ति संतुलन को नया रूप दे रही है। संभवतः उत्तर समय देगा पर संकेत स्पष्ट हैं। भारत अब तकनीक का केवल उपभोक्ता नहीं रहा। वह समाधान प्रस्तुत करने, मानक तय करने और साझेदारियों गढ़ने की क्षमता विकसित कर चुका है। आँकड़े साफ बताते हैं कि भारत केबल डिजिटल उपभोक्ता नहीं रहा, बल्कि वैश्विक टेक इकोसिस्टम की दिशा तय करने वाली उभरती शक्ति बन चुका है, यही कारण है कि मोदी और पिचाई की यह मुलाकात केवल एक समाचार घटना नहीं बल्कि उस भविष्य की झलक है जिसमें भारत वैश्विक डिजिटान व्यवस्था का सक्रिय निर्माता बन सकता है।

भारत डिजिटल परिदृश्यः प्रमुख आँकड़े (स्रोत: Data Reportal Digital 2026 India, अक्टूबर 2025)

कुल जनसंख्या 1.47 अरब

शहरी 37.5 प्रतिशत ग्रामीण 62.5 प्रतिशत

औसत आयु 28.8 वर्ष

मोबाइल कनेक्शन 1.06 अरब

इंटरनेट उपयोगकर्ता 1.03 अरब

ऑफलाइन आबादी 44 करोड़

औसत मोबाइल स्पीड 131.77 Mbps

सोशल मीडिया उपयोगकर्ता 500 मिलियन

YouTube 500 मिलियन

Instagram 481 मिलियन

Facebook 403 मिलियन

Snapchat 213 मिलियन

LinkedIn 170 मिलियन

डॉ. नयन प्रकाश गांधी (युवा प्रबंधन विश्लेषक एवं पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट)

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