नई दिल्ली/इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के तीसरे दिन भारत मंडपम्, नई दिल्ली में संयत गर्व की अनुभूति का वातावरण महसूस किया गया। घोषणा सादी है, किंतु अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत ने 24 घंटों के भीतर एआई रिस्पॉन्सिबिलिटी कैम्पेन के लिए सर्वाधिक प्रतिज्ञाएँ प्राप्त करने का खिताब हासिल कर गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया। 16 से 17 फरवरी के बीच कुल 2,50,946 वैध प्रतिज्ञाएँ दर्ज की गईं, जो प्रारंभिक 5,000 के लक्ष्य से कहीं अधिक हैं। यह केवल एक विश्व रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि एक युवा राष्ट्र की स्पष्ट मंशा की घोषणा है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता को नैतिक चेतना के साथ आकार देने का निर्णय ले रहा है।

16 से 20 फरवरी तक आयोजित यह शिखर सम्मेलन देश और विदेश से विद्यार्थियों, शिक्षकों, नवोन्मेषकों तथा नीति-निर्माताओं को निरंतर आकर्षित कर रहा है। इंडियाएआई मिशन के अंतर्गत इंटेल इंडिया के सहयोग से प्रारंभ किया गया एआई उत्तरदायित्व प्रतिज्ञा अभियान नागरिकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक, समावेशी और जवाबदेह उपयोग के प्रति वचनबद्ध होने के लिए आमंत्रित करता है। प्रतिज्ञा पूर्ण करने वाले प्रतिभागियों को एक डिजिटल बैज तथा संरचित एआई ज्ञानार्जन मार्गों तक पहुँच प्रदान की जाती है। यह पहल प्रतीकात्मक होने के साथ-साथ व्यावहारिक भी है, क्योंकि यह मंशा को शिक्षा से जोड़ती है।
मीडिया को संबोधित करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस विज़न पर बल दिया, जिसके तहत युवा भारतीयों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। देशभर के महाविद्यालयों को इस अभियान से जोड़ा जा रहा है, संकाय सदस्यों को सार्थक और जानकारीपूर्ण चर्चा का नेतृत्व करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, तथा विद्यार्थियों से आग्रह किया जा रहा है कि वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता को किसी शॉर्टकट के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक हित के एक प्रभावी साधन के रूप में देखें। उन्होंने 2,50,000 से अधिक प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट है—कृत्रिम बुद्धिमत्ता को उसकी मूल भावना में उत्तरदायित्व के साथ अपनाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम स्थल पर देखी जा रही ऊर्जा उसी स्पष्ट दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है। भारत विश्व में सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है, जहाँ 65 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। यह शिखर सम्मेलन इस जनसांख्यिकीय शक्ति को सुनियोजित रूप से केंद्र में रखता है। यहाँ होने वाली चर्चाएँ केवल एल्गोरिद्म और अवसंरचना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साक्षरता, नैतिकता और दीर्घकालिक क्षमता के इर्द-गिर्द केंद्रित हैं। यह आभास स्पष्ट है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब कोई दूरस्थ प्रौद्योगिकी नहीं रही; यह जीवन के लिए आवश्यक कौशल के रूप में विकसित हो रही है।

शोधार्थियों का नामांकन किया गया है। टियर-2 तथा टियर-3 शहरों में डेटा और एआई प्रयोगशालाएँ स्थापित की जा रही हैं। राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (नाइलिट) और उद्योग भागीदारों के सहयोग से 31 प्रयोगशालाएँ पहले ही शुरू की जा चुकी हैं, जबकि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने अतिरिक्त प्रयोगशालाओं के लिए 174 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक संस्थानों को नामित किया है। उन्नत उपकरणों तक पहुँच अब केवल कुछ महानगरीय केंद्रों तक सीमित नहीं रही है।
जैसे-जैसे शिखर सम्मेलन आगे बढ़ रहा है, वातावरण संतुलित किंतु आत्मविश्वास से भरा हुआ है। चर्चाएँ भविष्य की ओर उन्मुख हैं, परंतु उनका आधार ठोस क्रियान्वयन पर टिका है। नीति-निर्माता ध्यानपूर्वक सुनते हैं, जब किशोर अपने प्रोटोटाइप समझाते हैं। उद्योग जगत के प्रतिनिधि ऐसे विचारों की तलाश में हैं जो विस्तार योग्य होने के साथ-साथ नैतिक भी हों। यह संवाद औपचारिक कम और सार्थक अधिक प्रतीत होता है।
गिनीज़ की मान्यता एक विशेष क्षण को चिह्नित करती है, किंतु उसके पीछे का संकल्प कहीं अधिक गहरा है। भारत अवसंरचना में निवेश कर रहा है, अनुसंधान को प्रोत्साहित कर रहा है, कौशल विकास की श्रृंखलाओं को सुदृढ़ बना रहा है और अपनी युवा पीढ़ी को उभरती प्रौद्योगिकी की नैतिक दिशा निर्धारित करने के लिए आमंत्रित कर रहा है। यह रिकॉर्ड भले ही 24 घंटों में स्थापित हुआ हो, परंतु यह जिस वचनबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है, वह पीढ़ियों तक कायम रहने वाली है।





