Thursday, October 1, 2026
file_000000004a5481f7b6296622e40fa12b
previous arrow
next arrow

Top 5 This Week

Related Posts

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित HPC कमेटी के समक्ष शाहबाद (बारां) को अरावली क्षेत्र घोषित करने तथा ग्रीनको कंपनी के विनाशकारी पावर प्रोजेक्ट को निरस्त करने की पुरजोर मांग रखी

बारां।  सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC – High Powered Committee) द्वारा अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण, सीमांकन व पारिस्थितिकीय संतुलन के संदर्भ में अजमेर में जनसुनवाई आयोजित की गई। इस जनसुनवाई में ‘शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति, बारां’ के संरक्षक अधिवक्ता प्रशांत पाटनी ने समिति की अध्यक्ष एवं महानिदेशक (ICFRE) माननीया श्रीमती कंचन देवी जी के समक्ष समिति द्वारा निर्धारित 6 मुख्य संदर्भ बिंदुओं के आलोक में शाहबाद कंजर्वेशन रिजर्व एवं अरावली विस्तार का विस्तृत पक्ष और तथ्यात्मक ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने बारां जिले की पर्वत श्रृंखला को अरावली पर्वत श्रृंखला में शामिल किए जाने को केंद्र में रखते हुए समिति की ओर से बारां में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ” हमारी मुख्य चेतावनी है कि अरावली की बारां शाहबाद पर्वत श्रृंखला को विनाशकारी खतरा है

शाहबाद घाटी में ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (हैदराबाद) द्वारा प्रस्तावित विशाल पंप स्टोरेज पावर प्लांट के कारण लगभग 5 लाख फलदार व औषधीय वृक्षों की कटाई का अभूतपूर्व संकट मंडरा रहा है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि इस विनाशकारी परियोजना को तत्काल निरस्त किया जाए तथा सम्पूर्ण शाहबाद पर्वतीय घाटी को अरावली के तहत कानूनन ‘नो-गो एरिया’ (No-Go Area) घोषित किया जाए। समिति संरक्षक प्रशांत पाटनी ने

HPC कमेटी के समक्ष प्रस्तुत 6 प्रमुख संदर्भ बिंदुओं को उल्लेखित कर कहा कि

फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) की सितंबर 2025 की आधिकारिक वैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार 5 राज्यों में अरावली पर्वतमाला के तहत कुल 63 जिले आते हैं। इसके ठीक विपरीत, पर्यावरण मंत्रालय द्वारा अक्टूबर 2025 में प्रस्तुत शपथ पत्र में केवल 37 जिलों को ही अरावली क्षेत्र दर्शाया गया, जिससे 26 महत्वपूर्ण जिले अरावली सुरक्षा दायरे से बाहर हो गए। इनमें पूर्वी व दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के बारां, कोटा, बूंदी, झालावाड़, सवाई माधोपुर आदि प्रमुख जिले शामिल हैं। समिति ने इन सभी 26 जिलों को पुनः अरावली सूची में शामिल करने की मांग की।शाहबाद क्षेत्र हाड़ौती पठार पर स्थित एक अत्यंत संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र (Eco-sensitive zone) है, जो विंध्यन और अरावली पर्वत श्रृंखलाओं के दुर्लभ मिलन स्थल के रूप में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसे अरावली सुरक्षा दायरे से बाहर रखना इस क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी के लिए विनाशकारी सिद्ध होगा।

शाहबाद की अरावली पहाड़ियां पार्वती, कुन्नू और परवन जैसी प्रमुख नदियों का मुख्य जलग्रहण क्षेत्र (Catchment area) हैं। यह पर्वत श्रृंखला भूजल स्तर को रिचार्ज करने और इस पूरे शुष्क-अर्धशुष्क अंचल को जल सुरक्षा प्रदान करने का मुख्य स्रोत है। यहाँ किसी भी प्रकार की औद्योगिक छेड़छाड़ से पूरे चंबल बेसिन के भूगर्भ जल चक्र को भारी क्षति पहुँचेगी।”

उन्होंने कहा कि”शाहबाद कंजर्वेशन रिजर्व वन्यजीवों का एक समृद्ध प्राकृतिक वास है। यहाँ तेंदुए, भालू और IUCN की रेड लिस्ट में शामिल अति-दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों की नेस्टिंग साइट मौजूद है। साथ ही, पूरे विश्व में पाई जाने वाली 450 औषधीय पौधों की प्रजातियों में से 332 प्रजातियाँ इसी जंगल में विद्यमान हैं। इसे अरावली घोषित करने पर ही इस अनमोल जैव विविधता को राष्ट्रीय स्तर का कानूनी कवच मिल सकेगा। शाहबाद की चट्टानी संरचना और भौगोलिक बनावट वैज्ञानिक रूप से प्राचीन अरावली पर्वतमालाओं का ही निरंतर विस्तार है। FSI की वैज्ञानिक रिपोर्ट इसकी भूवैज्ञानिक निरंतरता की पुष्टि करती है। इसे अरावली क्षेत्र घोषित होते ही कानूनी रूप से ‘नो-गो एरिया’ का दर्जा मिलेगा, जिससे अवैध खनन और व्यावसायिक दोहन पर पूर्ण रोक लग सकेगी।

यह क्षेत्र आदिम जनजाति ‘सहरिया’ का मूल प्राकृतिक निवास स्थान है। स्थानीय ग्रामीणों व आदिवासियों की आजीविका पूरी तरह से वनों, जल स्रोतों और वनोपज पर निर्भर है। विनाशकारी औद्योगिक परियोजनाओं से उनकी आजीविका छिन जाएगी और सामाजिक-सांस्कृतिक ताना-बाना पूरी तरह नष्ट हो जाएगा।”

समिति की ओर से मांग की गई कि

FSI की सितंबर 2025 रिपोर्ट को पूर्ण रूप से स्वीकार करते हुए बारां जिले सहित सभी 63 जिलों को आधिकारिक अरावली क्षेत्र घोषित किया जाए साथ ही उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित गोवर्धन पर्वत / ब्रजभूमि को भी इसमें शामिल किया जाए। अरावली के संरक्षण सम्बन्धी नियमों के अनुसार ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित पंप स्टोरेज प्लांट को अविलंब रद्द कर 5 लाख वृक्षों को कटने से बचाया जाए।

जनसुनवाई का सरलीकरण किया जाकर मात्र 21 दिन की अवधि व गूगल फॉर्म/ईमेल आधारित जटिल डिजिटल प्रक्रिया के स्थान पर स्थानीय स्तर (शाहबाद/बारां) पर पारदर्शी, ऑफलाइन व जन-सुलभ जनसुनवाई की व्यवस्था की जाए।

समिति माननीया अध्यक्ष महोदया से न्यायसंगत मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए पर्यावरण व स्थानीय जनता के हितों की रक्षा करने का विनम्र अनुरोध करती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles