Saturday, April 18, 2026
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मानवता और शिक्षा की मिसाल बने मोर सिंह भील,पीपलोदी स्कूल हादसे के बाद बच्चों की पढ़ाई के लिए दान किया अपना मकान

कोटा। झालावाड़ जिले के पीपलोदी में हुए दुर्भाग्यपूर्ण स्कूल हादसे ने पूरे क्षेत्र को गहरे शोक और चिंता में डुबो दिया, लेकिन इसी अंधकारपूर्ण समय में मानवता और सामाजिक चेतना की एक उज्ज्वल किरण बनकर सामने आए पीपलोदी निवासी मोर सिंह भील। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि जब इरादे नेक हों और संवेदनाएँ जीवित हों, तो समाज स्वयं समाधान खोज लेता है। बच्चों की शिक्षा बाधित न हो, इसी उद्देश्य से मोर सिंह भील ने अपना स्वयं का मकान विद्यालय संचालन हेतु दान कर समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

न्यू कोटा इंटरनेशनल सोसाइटी के तत्वावधान में कोटा में आयोजित हाडोती गौरव सम्मान 2026 समारोह में मोर सिंह भील को उनके इस अद्वितीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल ने उन्हें साफा पहनाकर, माल्यार्पण कर एवं शाल ओढ़ाकर हाडोती गौरव सम्मान से नवाजा।

विशेष बात यह रही कि संभागीय आयुक्त ने अपने सम्मान में प्राप्त साफा स्वयं मोर सिंह भील को पहनाकर उन्हें सम्मानित किया, जो इस त्याग और सेवा भावना के प्रति प्रशासन की गहरी संवेदना और सम्मान को दर्शाता है।

संकट की घड़ी में आगे आए दानवीर

स्कूल भवन के उपयोग में असमर्थता के कारण पीपलोदी के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका थी। अभिभावकों और शिक्षकों के समक्ष भविष्य को लेकर चिंता गहराने लगी थी। ऐसे कठिन समय में मोर सिंह भील ने बिना किसी स्वार्थ और अपेक्षा के अपने निजी मकान को अस्थायी विद्यालय के रूप में उपलब्ध कराने की घोषणा की।

उनके इस निर्णय से न केवल बच्चों की पढ़ाई को नया सहारा मिला, बल्कि पूरे गाँव में सकारात्मक ऊर्जा और विश्वास का संचार हुआ।

*समाज और प्रशासन ने की मुक्त कंठ से सराहना*

मोर सिंह भील के इस मानवीय कदम की ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों एवं जनप्रतिनिधियों ने खुले दिल से प्रशंसा की है। लोगों का कहना है कि ऐसे व्यक्तित्व ही कठिन समय में समाज की वास्तविक शक्ति बनते हैं। यह कदम सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय संवेदना का जीवंत उदाहरण है।

*प्रेरणा बन गया एक त्याग*

भले ही पीपलोदी स्कूल हादसा एक दर्दनाक घटना रही हो, लेकिन मोर सिंह भील का यह त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। उनका यह कार्य यह संदेश देता है कि संसाधनों की कमी भी मजबूत इच्छाशक्ति और संवेदना के आगे बाधा नहीं बन सकती।

*मानवता के इतिहास में अमिट नाम*

निस्संदेह, मोर सिंह भील का यह योगदान शिक्षा, समाज और मानवता के प्रति एक ऐसा उदाहरण है, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। उनका नाम उन लोगों में दर्ज हो गया है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी दूसरों के भविष्य के लिए अपने सुख-सुविधाओं को पीछे छोड़ देते हैं।

हाडोती गौरव सम्मान 2026 के कार्यक्रम संयोजक केके शर्मा कमल संभागीय संयोजक लोकेश शर्मा कार्यक्रम समन्वयक प्रतीक गोयल संरक्षक देवेंद्र सिंह चौहान परमानंद गोयल अध्यक्ष अंजू शर्मा सचिव पुष्पकांत शर्मा, समेत हाडोती गौरव सम्मानित सभी हस्तियों एवं उपस्थित नागरिकों ने खड़े होकर तालियां बजाकर मोर सिंह भील का स्वागत अभिनंदन किया।

*मकान से बड़ा बच्चों का भविष्य है”*

सम्मान समारोह के दौरान मोर सिंह भील ने भावुक शब्दों में कहा—

“मकान से बड़ा बच्चों का भविष्य है। यदि मेरे छोटे से सहयोग से बच्चों की पढ़ाई चल सकती है, तो इससे बड़ा सौभाग्य और क्या हो सकता है।”

उनकी यह सोच यह स्पष्ट करती है कि शिक्षा केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर सक्षम व्यक्ति का नैतिक दायित्व है।

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