Saturday, April 18, 2026
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श्री मथुराधीशजी मंदिर कोरिडोर को मिली रफ्तार, रिवर फ्रंट से मंदिर तक बनेगा भव्य मार्ग

(प्रतीकात्मक इमेज AI)

कोटा।श्री मथुराधीशजी मंदिर कोरिडोर के बहुप्रतीक्षित विकास कार्यों को लेकर कोटा में महत्वपूर्ण प्रगति सामने आई है। कोटा दक्षिण के विधायक संदीप शर्मा, कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) के सचिव मुकेश कुमार चौधरी, उपायुक्त मालविका त्यागी एवं निदेशक अभियांत्रिकी रवीन्द्र माथुर द्वारा हाल ही में प्रस्तावित कोरिडोर स्थल का संयुक्त रूप से मौका मुआयना किया गया। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र की स्थिति का जायजा लिया और आगामी विकास कार्यों को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के पश्चात यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि रिवर फ्रंट से श्री मथुराधीशजी मंदिर को जोड़ने वाला एक सुव्यवस्थित और भव्य मार्ग विकसित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके। साथ ही प्रथम चरण में नामदेव धर्मशाला के स्थान पर आधुनिक पार्किंग सुविधा विकसित करने का निर्णय भी लिया गया, जिससे मंदिर क्षेत्र में यातायात दबाव कम होगा।

प्रस्तावित कोरिडोर के अंतर्गत आने वाले भवनों का सर्वे कार्य पहले ही समिति द्वारा पूरा किया जा चुका है। प्रथम चरण के विकास कार्य में कुल 23 मकान प्रभावित हो रहे हैं। इन्हीं प्रभावित मकान मालिकों एवं नामदेव समाज के प्रतिनिधियों के साथ केडीए मंथन हॉल में एक विस्तृत बैठक आयोजित की गई।

बैठक में केडीए सचिव मुकेश कुमार चौधरी एवं प्राधिकरण के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने अधिग्रहण प्रक्रिया, मुआवजा नीति और पुनर्वास से जुड़ी सभी जानकारियां विस्तार से साझा कीं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रभावितों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत उचित मुआवजा दिया जाएगा।

बैठक के दौरान अधिकांश मकान मालिकों ने पारस्परिक सहमति से अधिग्रहण पर सहमति जताई। वहीं कुछ मामलों में उठाई गई आपत्तियों को लेकर प्राधिकरण ने सात दिवस के भीतर समाधान करने का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने कहा कि आपत्तियों का निस्तारण प्राथमिकता से किया जाएगा ताकि विकास कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो।

श्री मथुराधीशजी मंदिर कोरिडोर परियोजना के पूर्ण होने से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि कोटा शहर को एक नई पहचान भी मिलेगी। यह परियोजना श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक, सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

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