सारंग साहित्य समिति द्वारा संभागीय रचनाकार सम्मेलन सम्पन्न, हाड़ौती में सृजन पर गहन मंथन
कोटा। बालिता रोड स्थित एक मैरिज गार्डन में सारंग साहित्य समिति के तत्वावधान में राजस्थान साहित्य अकादमी के सहयोग से संभागीय रचनाकार सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में कोटा के साथ विभिन्न स्थानों से आए साहित्यकारों ने साहित्य के विकास, नवाचार तथा हाड़ौती में सृजनशीलता पर अपने विचार व्यक्त किए।
मुख्य अतिथि मंडल पुस्तकालय अधीक्षक दीपक श्रीवास्तव रहे, जबकि अध्यक्षता साहित्य अकादमी के सचिव बसंत सोलंकी ने की।
मुख्य अतिथि श्रीवास्तव ने कहा कि “सृजन के लिए निरंतर सीखना, पढ़ना और आत्मअनुशासन आवश्यक है।” उन्होंने साहित्यकार के लिए नम्रता और मानवीय दृष्टिकोण को महत्वपूर्ण बताया। सोलंकी ने कहा कि साहित्यकार की पहचान उसके लेखन से बनती है — संदेशात्मक, जिम्मेदार और जनकल्याणकारी लेखन ही वास्तविक साहित्य है।
अध्यक्ष रामकरण प्रभाती ने सम्मेलन का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा संचालन डॉ. रामावतार सागर द्वारा किया गया।

हाड़ौती में हिन्दी लघुकथा के योगदान पर विशेष सत्र
विशेष सत्र “हाड़ौती अंचल के साहित्यकारों का हिन्दी लघुकथा में योगदान” विषय पर आयोजित हुआ।अध्यक्षता प्रो. कृष्ण बिहारी भारतीय ने की और मुख्य अतिथि भागीरथ परिहार रहे।
कथाकार विजय जोशी ने कहा कि वर्तमान दशक लघुकथाओं के लिए अत्यंत सकारात्मक है। हाड़ौती की लघुकथाएँ 70 के दशक से राष्ट्रीय पहचान बनाकर साहित्य को समृद्ध कर रही हैं। वरिष्ठ कथाकार परिहार ने कहा कि लघुकथा का सृजन आज एक आंदोलन के रूप में उभर रहा है।

⭐ पाँच पुस्तकों का लोकार्पण, वरिष्ठ साहित्यकारों को सम्मान
कार्यक्रम में निम्न पुस्तकों का विमोचन किया गया—
डॉ. अनीता वर्मा — आंखें बोलती हैं, चिंतन मनन अभिव्यक्ति (निबंध संग्रह)
रामकरण प्रभाती — मीठी सी झंकार
सत्येंद्र वर्मा — मारुति नंदन (काव्यकृति)
विमोचन समारोह की अध्यक्षता महाकवि किशनलाल वर्मा ने की तथा मुख्य अतिथि डॉ. सुरेश पांडे रहे। संचालन गीतकार रामविलास रखवाला ने किया।
सम्मेलन में साहित्यकार रघुराज सिंह कर्मयोगी, विजय जोशी, रामदयाल मेहरा को सारंग साहित्य सम्मान तथा रमेश नाकोड़ा, गोरस प्रचंड, महावीर मेहरा को सारंग शिखर सम्मान से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में संस्था महासचिव सुरेश वैष्णव, सचिव रविंद्र बीकावत, जितेन्द्र निर्मोही, दिनेश सिंह, चांद शेरी, हलीम आईना सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।





