Wednesday, August 12, 2026
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132वां राष्ट्रीय मेला दशहरा कोटा: पुत्रेष्टि यज्ञ पर पलकें हुई गीली, श्रीराम के जन्म पर गूंज उठे जयकारे, बाल लीलाओं ने मनमोहा 

के डी अब्बासी

कोटा/राष्ट्रीय मेला दशहरा 2025 के अंतर्गत श्रीराम रंगमंच पर मंचित हो रही श्री रामलीला के तीसरे दिन बुधवार को पृथ्वी पुकार, पुत्रेष्टी यज्ञ, श्रीराम प्राकट्य, बाल लीला, शिव दर्शन, विद्या अध्ययन के प्रसंगों का मंचन किया गया। श्रीराम रंगमंच पर राघवेंद्र कला संस्थान के कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों को भाव विभोर कर दिया।

मेला समिति अध्यक्ष विवेक राजवंशी, मेला प्रभारी सत्यनारायण राठौर, महावीर चौहान ने भगवान विष्णु के प्रतिरूप की आरती कर रामलीला मंचन का शुभारंभ किया।

रामलीला के दौरान विभिन्न प्रसंगों पर दर्शकों की भाव भंगिमाएं भी बदलती रही। श्रीराम के जन्म के बाद बाल लीलाओं और शिव के द्वारा दर्शनों के प्रसंगों पर दर्शकों की गुदगुदी छूट गई। वहीं संतान सुख से वंचित दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ और जनकपुरी में अकाल के दृश्यों ने भाव विभोर कर दिया। राजा जनक के प्रजा के लिए हल चलाने और सीता जन्म के प्रसंग मार्मिक बन गए थे।

श्रीराम जन्म की लीला देख श्रीराम रंगमंच जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। लीला में बताया कि राजा दशरथ की तीनों रानियों के कोई पुत्र नहीं था। तब राजा दशरथ श्रृंगी ऋषि के पास पहुंचे और अपने मन की व्यथा सुनाई। ऋषि ने राजा दशरथ को एक फल दिया और तीनों रानियों को खिलाने को कहा। फल के सेवन के बाद रानी कौशल्या ने श्रीराम, रानी सुमित्रा ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न रानी कैकयी ने भरत को जन्म दिया। चारों बच्चों के जन्म पर समस्त अयोध्या में खुशियां मनाई गई और मंगल गीत गाए गए। श्रीराम के जन्म का मंचन होते ही दर्शकों ने फूलों की बारिश की व पूरा परिसर श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। यह दृश्य देख सभी श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। राम लीला के दौरान प्रभु श्रीराम समेत चारों भाइयों के बाल्यावस्था का सजीव मंचन भी किया गया।

*रावण के अत्याचारों से त्रस्त हुई धरती*

मंचन में कलाकारों ने दिखाया कि रावण के अत्याचार से पृथ्वी कराह उठती है और पृथ्वी लोक के साथ ही देवलोक में भी सभी भयभीत हो उठते हैं। सभी देवी-देवता तथा गौ रूप में पृथ्वी एक साथ ब्रह्मा जी के पास पहुंचते हैं और वंदना करते हैं। आकाशवाणी होती है कि अयोध्या में राजा दशरथ के घर भगवान राम का जन्म होगा और आप सभी को रावण के अत्याचार से छुटकारा मिलेगा। सभी प्रसन्न होकर अपने-अपने स्थान को लौट जाते हैं। उधर राजा दशरथ को पुत्र न होने से चिंता होती है। गुरु वशिष्ठ के निर्देश पर वह श्रृंग ऋषि से पुत्रेष्टि यज्ञ कराते हैं। समय आने पर राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न का जन्म होता है और अयोध्या में खुशियां मनाई जाती हैं। श्रीराम के जन्म पर दर्शकों ने जयकारों से आसमान गूंजा दिया।

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