✍️डॉ नयन प्रकाश गांधी
“पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट डॉ. नयन प्रकाश गांधी का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा भारत-जापान के आर्थिक सहयोग में एक नया युग लाएगी। उनके अनुसार, जापान का 10 ट्रिलियन येन निवेश भारत के तकनीकी विकास, औद्योगिकीकरण और स्टार्टअप्स को मजबूती देगा। इससे रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे और रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा। यह साझेदारी भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है ”
भारत और जापान के बीच आर्थिक सहयोग की कहानी वर्ष दर वर्ष और भी सशक्त हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी जापान यात्रा, 29 अगस्त को शुरू होने जा रही है, जिस पर सिर्फ दोनों देशों की कूटनीतिक मित्रता ही नहीं, बल्कि आर्थिक व्यवस्थाओं का भविष्य भी टिका है। जापान भारत में अगले दस वर्षों में 10 ट्रिलियन येन (68 अरब डॉलर) निवेश का लक्ष्य निर्धारित कर रहा है ,यह पुराने निवेश लक्ष्य के दोगुने से भी ज्यादा है। जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच टोक्यो में होने वाली शिखर वार्ता इस नए अध्याय की शुरुआत कर सकती है।अब तक जापान ने हर वित्तीय वर्ष में भारत में लगभग 1 ट्रिलियन येन का निवेश किया है। ये आंकड़े यह बताते हैं कि जापान न सिर्फ भारत का भरोसेमंद साझेदार है, बल्कि उसने भारत की अर्थव्यवस्था में स्थायी योगदान दिया है। मार्च 2022 में, तत्कालीन प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने पांच साल में 5 ट्रिलियन येन निवेश का लक्ष्य पेश किया था, किंतु अब आर्थिक साझेदारी के विस्तार का नया दौर शुरू होने जा रहा है।
भारत के विकास के लिए यह निवेश बेहद महत्वपूर्ण है। बुनियादी ढांचे की मजबूती, औद्योगीकरण, तकनीकी नवाचार तथा रोज़गार के नए अवसर पैदा करने में जापान की भूमिका निर्णायक रही है। जापान के निवेश से भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम, नवीनतम टेक्नॉलजी, व उत्पादन के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तथा गुणवत्ता में वृद्धि हुई है।
नये आर्थिक सुरक्षा पहल: रणनीतिक साझेदारी
यह नया द्विपक्षीय सहयोग ढांचा, मुख्य रूप से आर्थिक सुरक्षा पर केंद्रित रहेगा। प्रमुख सामग्रियों की स्थिर आपूर्ति, बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, खनिज, दूरसंचार, स्वच्छ ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और एआई समेत विभिन्न क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। खास बात ये है कि एआई, स्टार्टअप्स और डिजिटल पार्टनरशिप 2.0 के तहत दोनों देश भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए साझेदारी करेंगे।भारत और जापान की सरकारें ‘आर्थिक सुरक्षा सहयोग’ की एक मजबूत नींव स्थापित करने जा रही हैं, जिसके तहत आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जाएगा और तकनीकी व वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। ऐसे समय में, जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अस्थिरता है, भारत के लिए जापान जैसा भरोसेमंद साथी अभूतपूर्व क्षमता ला सकता है
मोदी की सोच और विश्वस्त चरित्र
प्रधानमंत्री मोदी का ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे अभियानों को जापान के सहयोग से नए आयाम मिल सकते हैं। मोदी जानते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था को ऊँचाई तक ले जाना है तो विश्वस्त साझेदारों के साथ समन्वित कार्य करना आवश्यक है। जापान की तकनीकी क्षमता, पूंजी और वैश्विक तजुर्बे का लाभ भारत को मिलता आया है और भविष्य में भी यह साझेदारी भारत की आर्थिक प्रगति को आगे बढ़ाएगी।
विकास के नए आयाम
मोदी और जापान के नवाचार की साझेदारी, तकनीक आधारित उद्योगों की स्थापना, पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा में निवेश, स्वास्थ्य क्षेत्र में अनुसंधान, मजबूत स्टार्टअप कल्चर जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। यह निवेश न सिर्फ भारत-जापान के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगा, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक पटल पर अग्रणी बना सकता हैप्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा ऐतिहासिक साबित हो सकती है। भारत-जापान की आर्थिक साझेदारी, तकनीकी नवाचार, औद्योगिक विकास और विश्वस्त आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्र में नए-नए आयाम स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करेगी। जापान, भारत का भरोसेमंद साथी है, और दोनों देशों के मज़बूत संबंध हमारे देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाइयों पर ले जाएंगे — यह आर्थिक सहयोग भारत को वैश्विक नेता बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
✍️डॉ नयन प्रकाश गांधी
अर्बन प्लानिंग रिसर्चर एलुमनाई अंतराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान मुंबई एवं पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट
मोदी की जापान यात्रा: नए निवेश से भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने का अवसर









