Wednesday, February 25, 2026
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नाटकों में कठिन परिश्रम से प्राण फूँकने वाले हैं राम शर्मा कापरेन, नए कलाकारों को मौका देना उनकी प्राथमिकता

✍️मयूर सोनी

कोटा/नाटक लिखना और नाटक का मंचन करना इतना आसान नहीं होता,इसके लिए कठिन परिश्रम करना पड़ता है नाटक लिखना उस दिन सार्थक हो जाता है जिस दिन नाटक का मंचन किया जाता है वो दिन लेखक के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता, अभिनय करना भी कोई सरल काम नहीं है, नाटक लिखना और अभिनय करना, जब लेखक नाटक भी लिखे, उसी नाटक में अभिनय भी करें तो फिर परिश्रम भी कहीं अधिक करना पड़ता है, मैं बात कर रहा हूँ साहित्यकार, अभिनेता राम शर्मा जी ‘कापरेन’ की वैसे तो वह किसी परिचय के मोहताज नहीं है, साहित्य का क्षेत्र हो, या अभिनय का क्षेत्र हर कोई उनको जानता है उन्होंने दोनों क्षेत्रों में अपनी कला की छाप छोड़ी, हर किसी के दिल को जीत लिया अपने अभिनय से अपने साहित्य से, बूंदी जिले के कापरेन में जन्मे राम शर्मा जी साहित्य के प्रति, रंग कर्म के प्रति हमेशा समर्पित रहते है, ‘जलन से जलतरंग’ नाटक का हाल ही में इसका मंचन किया गया जो प्रशंसनीय है इससे पूर्व भी ‘घोड़ा उपचार क्लिनिक’ और बाल नाटक सारी बेटा बाल कलाकारों द्वारा मंचित किया गया उन्होंने और भी कई नाटकों को रंगमंच पर प्रस्तुत किया है,

राम शर्मा जी ‘कापरेन’ सामाजिक सरोकारों से जुड़े नाटक- उनके नाटकों में समाज में फैली बुराइयों से कैसे सामना किया जाए यह बताया जाता है जो प्रेरणादायक होता फिर चाहे वो भ्रष्टाचार हो या एसिड पीड़िता, टिटहरी के अंडे’ नाटक में भी जबरदस्त अभिनय देखने को मिला उनके मजबूत अभिनय नाटक में प्राण फूँक देते हैं वर्तमान में वह नर्सिंग ऑफिसर के तौर मेडिकल कॉलेज में कार्यरत है हाल ही उनका एक ‘नाटक ‘जलन से जलतरंग’ मंचित हुआ जिसमें निम्मो के पिता की भूमिका राम शर्मा ने निभाई, नाटक के मुख्य पात्र निम्मो की भूमिका में लावण्या जोशी ने निभाई,सभी पात्र अपने-अपने भूमिकाओं में फिट बैठते हैं निम्मो की माँ की भूमिका हिमानी शर्मा ने निभाया- अक्सर देखा जाता है कि मां अपने बच्चों की गलतियों को छुपा लेती है, जिससे बच्चे कुसंगत में चले जाते हैं आगे जाकर वह एक बड़ी समस्या बन जाती है

इस इस नाटक में जो राम शर्मा जी ने पिता की भूमिका निभाई है वह एक मजबूत पिता के रूप में थे जो बच्चों की बुरी आदतों में सुधार करते नजर आए, अपनी बेटी पर हुए एसिड अटैक के क्षण में भी वह एक मजबूत पिता के रूप में उभर कर सामने आए, उनका यह अभिनय समाज को प्रेरणा देता है कि कैसा भी समय हो हमें मजबूती से उसका सामना करना चाहिए, न्याय लिए लड़ना चाहिए, ताकि फिर कोई अपराधी ऐसी घटना को अंजाम न दे सके

नाटक मंचन में नए कलाकारों को लेना- राम शर्मा जी ने ‘ जै हो थाँकी’ नाटक में नए लोगों को अभिनय के लिए जोडना बहुत कठिन होता है जब नए कलाकारों को नाटक मंचन से जोड़ा जाता है तो बहुत कठिन परिश्रम करना होता है राम शर्मा जी कठिन मेहनत करके नये कलाकारों को रंगमंच पर प्रस्तुत करते हैं जहां दर्शकों को बिल्कुल भी यह महसूस नहीं होता है कि वह रंगमंच पर नए हैं –

उनके कठिन परिश्रम को समर्पित एक लेख – मयूर सोनी✍️

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