Wednesday, February 25, 2026
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संत श्री तुलसीदास… (संत तुलसीदास जयंती विशेष)-कालीचरण राजपूत

संत श्री तुलसीदास…

(संत तुलसीदास जयंती विशेष)

 

प्रयाग के नजदीक में, राजापुर है गाम।

चित्रकूट जनपद रहा, सुंदर सा वह धाम ।।

पिता आत्मा राम थे, हुलसी बाई मात ।

इसी एक परिवार में, तुलसी पाया गात ।।

पिता सरयू पारीन थे, ब्राह्मण था परिवार ।

अभुक्त मूल नक्षत्र में, मिला मात का प्यार ।।

श्रावण शुक्ला सप्तमी, पंद्रह सौ चौपान ।

द्वादश मासी गर्भ में, लगा रहे थे ध्यान ।।

जनम जो पाया पुत्र ने, मुख से निकला राम ।

बाल रुदन नहीं था वहां, खुशी हो गई बाम ।।

दंत उसे बत्तीस थे, जब लीना अवतार ।

दो दिन में माता गई, दासी से मिला दुलार ।।

चुनिया दासी चलबसी, पांच वर्ष के बाद ।

छोटा वह कुमार था, कुछ भी नहीं था याद ।।

दर-दर ठोकर खा रहा, सुंदर बाल कुमार ।

नरहरि दास साधु मिले, उनसे मिला दुलार ।।

राम राम कहता सदा, राम का करता काम ।

राम कृपा के कारने, राम पड़ा था नाम ।।

रामशैल पर, राम को, नर हरि ढूंढा, दास ।

यज्ञ उपवीत राम का, हुआ अवध के पास ।

गुरु करते थे बात जो, सुनी उन्हीं से आज ।

बात सभी घर कर गई, अद्भुत था यह राज ।।

पहले रामायण सुनी, शूकर जी के क्षेत्र ।

बार-बार श्रवण पर भी, नहीं खुले थे नेत्र ।।

ज्ञान चक्षु ऐसे खुले, सोलह रचे थे ग्रंथ ।

अवधी में ज्यादा लिखे, पढ़ते सारे संत ।।

फिर चलते-चलते..

संवत सोलह असी में, असी गंग के तीर ।

श्रावण कृष्णा तीज को, तुलसी तजो शरीर ।।

तुलसी तजो शरीर…..

के.सी. राजपूत, कोटा ।

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