संत श्री तुलसीदास…
(संत तुलसीदास जयंती विशेष)
प्रयाग के नजदीक में, राजापुर है गाम।
चित्रकूट जनपद रहा, सुंदर सा वह धाम ।।
पिता आत्मा राम थे, हुलसी बाई मात ।
इसी एक परिवार में, तुलसी पाया गात ।।
पिता सरयू पारीन थे, ब्राह्मण था परिवार ।
अभुक्त मूल नक्षत्र में, मिला मात का प्यार ।।
श्रावण शुक्ला सप्तमी, पंद्रह सौ चौपान ।
द्वादश मासी गर्भ में, लगा रहे थे ध्यान ।।
जनम जो पाया पुत्र ने, मुख से निकला राम ।
बाल रुदन नहीं था वहां, खुशी हो गई बाम ।।
दंत उसे बत्तीस थे, जब लीना अवतार ।
दो दिन में माता गई, दासी से मिला दुलार ।।
चुनिया दासी चलबसी, पांच वर्ष के बाद ।
छोटा वह कुमार था, कुछ भी नहीं था याद ।।
दर-दर ठोकर खा रहा, सुंदर बाल कुमार ।
नरहरि दास साधु मिले, उनसे मिला दुलार ।।
राम राम कहता सदा, राम का करता काम ।
राम कृपा के कारने, राम पड़ा था नाम ।।
रामशैल पर, राम को, नर हरि ढूंढा, दास ।
यज्ञ उपवीत राम का, हुआ अवध के पास ।
गुरु करते थे बात जो, सुनी उन्हीं से आज ।
बात सभी घर कर गई, अद्भुत था यह राज ।।
पहले रामायण सुनी, शूकर जी के क्षेत्र ।
बार-बार श्रवण पर भी, नहीं खुले थे नेत्र ।।
ज्ञान चक्षु ऐसे खुले, सोलह रचे थे ग्रंथ ।
अवधी में ज्यादा लिखे, पढ़ते सारे संत ।।
फिर चलते-चलते..
संवत सोलह असी में, असी गंग के तीर ।
श्रावण कृष्णा तीज को, तुलसी तजो शरीर ।।
तुलसी तजो शरीर…..
के.सी. राजपूत, कोटा ।
संत श्री तुलसीदास… (संत तुलसीदास जयंती विशेष)-कालीचरण राजपूत





